केरल में मानसून ने दी दस्तक, खरीफ फसलों के उत्पादन में है अहम भूमिका
नई दिल्ली। दक्षिण पश्चिमी मानसून ने केरल के तट समेत पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में तय समय से दो दिन पहले गुरुवार को दस्तक दे दी है साथ ही मानसून पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में आगे बढ़ गया है। केरल में मानसून का आगमन तय समय से दो दिन पहले हुआ है।
भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी ने इस साल मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश होने की भविष्यवाणी की है, जोकि देश की कृषि एवं अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर संकेत है।
खरीफ फसलों के उत्पादन में मानसूनी बारिश काफी महत्वपूर्ण है, तथा मानसून की अच्छी बारिश होने से देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ने के साथ ही यह महंगाई दर को भी काबू में करने में मदद करेगी। बीते साल मानसूनी बारिश देश के कई हिस्सों में असामान्य हुई थी, जिसका असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ा था। देशभर के 36 सबडिवीजनों में सामान्य मानसूनी बारिश होती है, तो इससे किसानों को काफी फायदा होगा, तथा ग्रामीण क्षेत्रों से मांग में सुधार आयेगा।
खरीफ फसलों दलहन के साथ ही मोटे अनाजों एवं धान की फसल के लिए मानसून बारिश पर देश के किसान ज्यादा निर्भर हैं। घरेलू बाजार में इस समय दलहनी फसलों की कीमतें तेज बनी हुई है, अत: अच्छे मानसून से किसान खरीफ दलहन खासकर के अरहर एवं उड़द के साथ मूंग की बुआई ज्यादा करेंगे।
आईएमडी के अनुसार दक्षिण पश्चिमी मानसून केरल में दस्तक दे चुका है तथा 30 मई को पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में आगे बढ़ गया है। आमतौर पर दक्षिण पश्चिमी मानसून एक जून को केरल में दस्तक देता है और 5 जून तक पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में आगे बढ़ जाता है। मानसून लक्षद्वीप क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों, दक्षिण अरब सागर, मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों और दक्षिण तमिलनाडु के कई हिस्सों में भी आगे बढ़ चुका है।
चक्रवात रेमल की वजह से दक्षिण पश्चिमी मानसून तय तिथि से पहले ही केरल तट और पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्सों में पहुंच गया है। अगले दो, तीन दिनों में मानसून के आगे बढ़ने की उम्मीद है। पिछले दो दिनों के दौरान दक्षिण पूर्व अरब सागर में बादल छाए रहे तथा केरल में तेज बारिश हुई। राज्य में कुछ स्थानों पर ज्यादा से बहुत ज्यादा बारिश दर्ज की गई। इन स्थितियों को देखते हुए ही भारतीय मौसम विभाग ने दक्षिण पश्चिमी मानसून के केरल में आगमन की घोषणा कर दी।