चना कमजोर, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम स्थिर, ग्वार गम एवं सीड के नरम
नई दिल्ली। दिल्ली में चना के दाम दूसरे दिन 25 रुपये कमजोर हो गए। व्यापारियों के अनुसार केंद्र सरकार स्टॉक लिमिट लगाने की खबर से चना अपने ऊंचे दाम से 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल तक कमजोर हो चुका है। हालांकि स्टॉकिस्ट ज्यादा मंदे में नहीं है क्योंकि राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों में चना की आवक पहले की तुलना में कम हो रही हैं तथा उत्पादन अनुमान कम है। उधर ऑस्ट्रेलिया से आयातित चना के पड़ते महंगे हैं। लारेंस रोड पर राजस्थान के चना के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 7,150 से 7,175 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के दाम 25 रुपये घटकर 7,125 से 7,150 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
सोलापुर में अरहर के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मुनाफावसूली से अरहर की कीमतों में नरमी आ सकती है, क्योंकि दाल मिलें इन भाव में खरीद से परहेज कर रही है क्योंकि बढ़ी हुई कीमतों में अरहर दाल में मांग नहीं बढ़ पा रही है। वैसे भी सरकार दलहन की कीमतों की लगातार समीक्षा कर रही है। म्यांमार से लेमन का आयात बराबर हो रहा है, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट भी आ रही। ऐसे में इसके भाव में तेजी आने पर मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। हालांकि देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है तथा उत्पादन अनुमान भी कम है। केंद्रीय पूल में अरहर का बकाया स्टॉक भी कम है। सोलापुर में अरहर के दाम 100 रुपये तेज होकर भाव 10,900 से 12,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में स्थिर हो गई, हालांकि बुधवार को इसके दाम तेज हुए थे जिस कारण आयात पड़ते महंगे होने से आयातक दाम तेज कर रहे हैं। हालांकि उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक बढ़ी है, जबकि उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। वैसे भी उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक चालू महीने में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। म्यांमार से उड़द का आयात बराबर बना रहेगा, साथ ही म्यांमार में उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 1,115 डॉलर और एसक्यू के 1,210 डॉलर प्रति बोले गए।
मूंग के भाव दिल्ली में बुधवार को कमजोर हुए थे, जबकि आज स्थिर खुले हैं। व्यापारियों के अनुसार मूंग दाल में ग्राहकी कमजोर है जबकि मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक पहले की तुलना में बढ़ी है। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। मूंग दाल में ग्राहकी जून में कम रहेगी। दिल्ली में मूंग के दाम 8,125 से 8300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
देसी मसूर की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की मंडियों में मसूर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है, साथ ही आयातित मसूर के पड़ते उंचे हैं। इसलिए इसके भाव में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है। जानकारों के अनुसार चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है तथा केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। केंद्रीय पूल में मसूर का पुराना स्टॉक भी अच्छा है। मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग जून में सामान्य की तुलना में कम रहेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,700 से 6,725 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
धान के साथ ही बासमती चावल के दाम स्थिर बने हुए हैं। जानकारों के अनुसार चावल की मौजूदा कीमतों में निर्यातकों की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है हालांकि इन भाव में मिलों को भी नुकसान हो रहा है। इसलिए इसके भाव रुके हुए हैं। हालांकि आगामी दिनों में साठी धान की आवक बढ़ेगी, उससे कीमतों पर दबाव बनेगा। हरियाणा लाइन से 1,509 स्टीम चावल का व्यापार 7550 से 7600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। टोहाना लाइन से 1,401 स्टीम का व्यापार 7,700 से 7,750 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
फ्लोर मिलों की खरीद सीमित बनी रहने के कारण बुधवार को दिल्ली में गेहूं की कीमतें 2,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। उत्पादक मंडियों में गेहूं की आवक पहले की तुलना में कम हो गई है, तथा स्टॉकिस्टों एवं मिलों की खरीद भी सीमित बनी हुई है। गेहूं की आवक 5,000 बोरियों की हुई।
चालू रबी विपणन सीजन 2024-25 में प्रमुख उत्पादक राज्यों से 263.98 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर हो चुकी है।
मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में बराबर बनी हुई है, इसलिए इसके भाव में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। छिंदवाड़ा में मक्का के भाव 2,130 से 2,250 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। चरखी दादरी मंडी में बाजरा में व्यापार 2,260 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
जौ के भाव स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। राजस्थानी की मंडियों में जौ के भाव 2000 से 2050 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं गए। गर्मी के कारण जौ की मांग और बढ़ेगी, जिससे कीमतों में आगे तेजी के आसार हैं।
चीनी की कीमतों में आगे और भी सुधार आयेगा। व्यापारी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। महाराष्ट्र की चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है।
सरसों के दाम कमजोर होने की उम्मीद है। मलेशिया में पाम तेल के भाव कमजोर हो गए,
हालांकि शिकागो में सोया तेल के दाम तेज हुए हैं। उत्पादक राज्यों में सरसों की दैनिक आवकों में आगे कमी आएगी, साथ ही उत्पादन उद्योग के अनुमान से कम रहने की उम्मीद है। आयातित खाद्वय तेलों में नरमी आई तो ही सरसों की कीमतों में मंदा आयेगा। सरसों तेल के साथ ही खल के दाम स्थिर हो गए।
घरेलू बाजार में पाम तेल और सनफ्लावर तेज है, जबकि अन्य तेलों के दाम स्थिर हैं। उधर मलेशिया में अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के भाव 28 रिगिंट कमजोर होकर 4,006 रिगिंट प्रति टन रह गए। हालांकि शिकागो में सोया तेल के दाम तेज खुले हैं। अत: घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों भाव में हल्का सुधार बन सकता है।
सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। ऐसे में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। शिकागो में सोयाबीन, सोया तेल और मील के दाम तेज हुए हैं।
गुजरात में कैस्टर सीड के भाव 1,115 से 1,130 रुपये प्रति 20 किलो पर स्थिर हो गए तथा आवक 92,000 बोरियों की हुई।
घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में नरमी आई है। उधर विदेशी बाजार में बुधवार को कॉटन के दाम कमजोर हुए थे, साथ ही आज भी आईसीई कॉटन वायदा में नरम हुए हैं। अत: घरेलू बाजार से कॉटन के निर्यात में पड़ते नहीं लग रहे, साथ ही यार्न की स्थानीय मांग भी कमजोर है। इसके बावजूद भी इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।
बिनौला एवं कपास खली के भाव नरम हो गए, लेकिन व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है। व्यापारियों के अनुसार मिलों की बिकवाली कमजोर है जबकि उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए कीमतों में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है
ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतें कमजोर हो गई। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य बनी हुई है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है। ऐसे में इनकी कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।