एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 29 मई 2024

चना और मसूर नरम, अरहर तेज, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम स्थिर, ग्वार गम एवं सीड के रुके
नई दिल्ली। दिल्ली में चना के दाम 25 रुपये कमजोर हो गए। व्यापारियों के अनुसार चना की कीमतों पर दबाव है, जहां बढ़े दाम पर मिलों की मांग कम हो जाती है, वहीं बिकवाली भी कमजोर है। वैसे भी राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों में चना की आवक पहले की तुलना में कम हुई हैं तथा उत्पादन अनुमान कम है। ऐसे में स्टॉकिस्ट ज्यादा मंदे में नहीं है। ऑस्ट्रेलिया से आयातित चना के पड़ते महंगे हैं। लारेंस रोड पर राजस्थान के चना के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 7,300 से 7,325 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के दाम 25 रुपये घटकर 7,250 से 7,275 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

चना की कीमतों में तेजी इसी तरह जारी रही तो फिर केंद्र सरकार स्टॉक लिमिट लगाने जैसा कदम उठा सकती है। उत्पादक मंडियों में चना के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी से 35 फीसदी तेज हो चुके हैं। केंद्र सरकार ने चना का एमएसपी 5,440 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि मंडियों में दाम 7,000 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल हैं।

सोलापुर में अरहर के भाव 100 रुपये तेज हो गए। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्ट अरहर की कीमतें तेज कर रहे हैं, क्योंकि आयात पड़ते महंगे हैं। हालांकि घरेलू बाजार में दाल मिलें बढ़े दाम जोखिम नहीं ले रही है, अत: जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है। वैसे भी बढ़े दाम पर अरहर दाल में उठाव नहीं बढ़ पा रहा है। सरकार दलहन की कीमतों की लगातार समीक्षा कर रही है। म्यांमार से लेमन का आयात बराबर हो रहा है, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट भी आ रही। ऐसे में इसके भाव में तेजी आने पर मुनाफावसूल करते रहना चाहिए। हालांकि देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है तथा उत्पादन अनुमान भी कम है। केंद्रीय पूल में अरहर का बकाया स्टॉक भी कम है। सोलापुर में अरहर के दाम 100 रुपये तेज होकर भाव 10,900 से 12,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार आयात पड़ते महंगे होने से आयातक दाम तेज कर रहे हैं। हालांकि उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक बढ़ी है, जबकि उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। वैसे भी उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक चालू महीने में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। म्यांमार से उड़द का आयात बराबर बना रहेगा, साथ ही म्यांमार में उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 1,105 डॉलर और एसक्यू के 1,200 डॉलर प्रति बोले गए।

मूंग के भाव दिल्ली में आज भी स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार मूंग दाल में ग्राहकी कमजोर है जबकि मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक पहले की तुलना में बढ़ी है। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। मूंग दाल में ग्राहकी जून में कम रहेगी। दिल्ली में मूंग के दाम 8,250 से 8400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

देसी मसूर की कीमतें 25 रुपये कमजोर हो गई। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की मंडियों में मसूर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है, साथ ही आयातित मसूर के पड़ते उंचे हैं। इसलिए इसके भाव में सुधार हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। केंद्रीय पूल में मसूर का पुराना स्टॉक भी अच्छा है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग जून में सामान्य की तुलना में कम रहेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,750 से 6,775 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के दाम स्थिर बने हुए हैं। जानकारों के अनुसार चावल की मौजूदा कीमतों में निर्यातकों की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है हालांकि इन भाव में मिलों को भी नुकसान हो रहा है। इसलिए इसके भाव रुके हुए हैं। हालांकि आगामी दिनों में साठी धान की आवक बढ़ेगी, उससे कीमतों पर दबाव बनेगा। राजस्थान लाइन से सुगंधा सेला का व्यापार 4850 से 4900 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। आरएस 10 सेला के भाव 25 से 50 रुपये तेज होकर 4,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

फ्लोर मिलों की खरीद सीमित बनी रहने के कारण बुधवार को दिल्ली में गेहूं की कीमतें 2,575 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। उत्पादक मंडियों में गेहूं की आवक पहले की तुलना में कम हो गई है, तथा स्टॉकिस्टों एवं मिलों की खरीद भी सीमित बनी हुई है।

चालू रबी विपणन सीजन 2024-25 में प्रमुख उत्पादक राज्यों से 263.68 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर हो चुकी है।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में बराबर बनी हुई है, इसलिए इसके भाव में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। सांगली मंडी में स्टार्च मक्का के भाव 2,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। पंजाब पहुंच बाजरा में व्यापार 2,375 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थि हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। हिसार मंडी में जौ के भाव 2000 से 2050 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। जौ की कीमतों में आगे और तेजी बनेगी।

चीनी की कीमतों में सुधार आया है। व्यापारी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। महाराष्ट्र की चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है।

सरसों के दाम नरम होने की उम्मीद है। मलेशिया में पाम तेल के भाव तेज हो गए, लेकिन शिकागो में सोया तेल के दाम कमजोर हुए हैं। उत्पादक राज्यों में सरसों की दैनिक आवकों में आगे कमी आएगी, साथ ही उत्पादन उद्योग के अनुमान से कम रहने की उम्मीद है। आयातित खाद्वय तेलों में नरमी आई तो ही सरसों की कीमतों में मंदा आयेगा। सरसों तेल के भाव 20 से 30 रुपये तेज हुए हैं, जबकि खल में भी मांग बढ़ी है।

हैफेड 30 मई को 15,189 टन सरसों निविदा के माध्यम से बेचेगी।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव 5-30 रुपये तक तेज हुए हैं। मलेशिया में अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के भाव 45 रिगिंट तेज होकर 4,005 रिगिंट प्रति टन हो गए। हालांकि शिकागो में सोया तेल के दाम कमजोर हुए हैं। अत: घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों भाव में हल्का सुधार बन सकता है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। ऐसे में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। शिकागो में सोयाबीन, सोया तेल और मील के दाम कमजोर हुए हैं।

गुजरात में कैस्टर सीड के भाव 10 रुपये तेज होकर 1,105 से 1,130 रुपये प्रति 20 किलो हो गए तथा राजकोट में कमर्शियल तेल के दाम 5 रुपये बढ़कर 1,145 रुपये और एफएसजी के 5 रुपये तेज होकर 1,155 रुपये प्रति 10 किलो हो गए।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में सुधार आया है। उधर विदेशी बाजार में मंगलवार को कॉटन के दाम तेज हुए थे। हालांकि घरेलू बाजार से कॉटन के निर्यात में पड़ते नहीं लग रहे, साथ ही यार्न की स्थानीय मांग भी कमजोर है। इसके बावजूद भी इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव स्थिर हो गए, लेकिन व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है। व्यापारियों के अनुसार मिलों की बिकवाली कमजोर है जबकि उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए कीमतों में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है

ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य बनी हुई है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 2.74 फीसदी बढ़कर 4,17,691.00 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान इसका निर्यात केवल 4,06,531.00 टन का ही हुआ था।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *