चना कमजोर, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम रुके, ग्वार गम एवं सीड के दाम रुके
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें 50 रुपये कमजोर खुली हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से चना के दाम कमजोर हुए है, हालांकि इन भाव में व्यापार नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने भारत दाल योजना को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है, इसलिए मिलिंग के लिए चना का नया आवंटन नहीं किया जायेगा। व्यापारियों के अनुसार राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों में चना की आवक पहले की तुलना में कम हो गई हैं तथा उत्पादन अनुमान है इसलिए भविष्य तेजी का ही है। लारेंस रोड पर राजस्थान के चना के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 6,950 से 6,975 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के दाम 50 रुपये घटकर 6,925 से 6,950 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 11 मोटरों की हुई जबकि पिछले कारोबारी दिवस में आवक 6 मोटरों की हुई थी।
सोलापुर में अरहर के भाव स्थिर हो गए। उधर लेमन के दाम चेन्नई में डॉलर में स्थिर ही बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्ट अरहर की कीमतें तेज करना चाहते हैं, क्योंकि आयात पड़ते महंगे हैं। घरेलू बाजार में दाल मिलें बढ़े दाम जोखिम नहीं ले रही है, अत: जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है। वैसे भी बढ़े दाम पर अरहर दाल में उठाव नहीं बढ़ पा रहा है। सरकार दलहन की कीमतों की लगातार समीक्षा कर रही है। म्यांमार से लेमन का आयात बराबर हो रहा है, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट भी आ रही। ऐसे में इसके भाव में तेजी आने पर मुनाफावसूल करते रहना चाहिए। हालांकि देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है तथा उत्पादन अनुमान भी कम है। केंद्रीय पूल में अरहर का बकाया स्टॉक भी कम है। सोलापुर में अरहर के दाम 10,700 से 12,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में गुरुवार को नरम हुई थी, लेकिन आज दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक बढ़ी है, जबकि उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। वैसे भी उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक चालू महीने में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। म्यांमार से उड़द का आयात बराबर बना रहेगा, साथ ही म्यांमार में उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,170 डॉलर एफएक्यू के 1,080 डॉलर प्रति टन पर स्थिर हो गए।
मध्य प्रदेश से समर मूंग की खरीद के लिए राज्य सरकार ने किसानों से पंजीकरण करने के लिए कहां है।
मूंग के भाव दिल्ली में स्थिर हो गए। व्यापारी इसकी कीमतों में अभी बड़ी तेजी पक्ष में नहीं है। मूंग दाल में ग्राहकी कमजोर है इसलिए कीमतों में गिरावट आ सकती है। मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। मध्य प्रदेश की मंडियों में समर मूंग की आवक बढ़ने लगी है। दिल्ली में मूंग के दाम 8,475 से 8,625 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
मध्य प्रदेश से समर उड़द की खरीद के लिए राज्य सरकार ने किसानों से पंजीकरण करने के लिए कहां है, हालांकि उत्पादक मंडियों में नई उड़द एमएसपी से उंचे दाम पर बिक रही है।
देसी मसूर की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की मंडियों में मसूर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है, साथ ही आयातित मसूर के पड़ते उंचे हैं। इसलिए इसके भाव में सुधार हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। केंद्रीय पूल में मसूर का पुराना स्टॉक भी अच्छा है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग जून में सामान्य की तुलना में कम रहेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,700 से 6,725 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
धान के साथ ही बासमती चावल के दाम स्थिर हो गए। जानकारों के अनुसार चावल की मौजूदा कीमतों में निर्यातकों की मांग कमजोर बनी हुई है हालांकि इन भाव में मिलों को भी नुकसान हो रहा है। इसलिए इसके भाव रुक सकते हैं। आगामी दिनों में साठी धान की आवक बढ़ेगी, उससे कीमतों पर दबाव बनेगा। जानकारों के अनुसार साठी की बुआई इस बार कम हुई है। नरेला मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम 4,350 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
फ्लोर मिलों की खरीद सीमित बनी रहने के कारण शुक्रवार को दिल्ली में गेहूं की कीमतें 2,510 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। खाद्वय मंत्रालय के अनुसार सरकार लगातार गेहूं की कीमतों की समीक्षा कर रही है, तथा केंद्रीय पूल में गेहूं के कुल स्टॉक को लेकर पिछले साल की तुलना में बेहतर स्थिति में है। ऐसे में अगर कीमतों में तेजी आती है तो फिर सरकार खुले बाजार बिक्री योजना, ओएमएसएस के तहत गेहूं बेचने पर विचार करेगी। गेहूं की दैनिक आवक 1,000 बोरियों की हुई जबकि पिछले कारोबारी दिवस में आवक 1,500 बोरियों की हुई थी।
चालू रबी विपणन सीजन 2024-25 में प्रमुख उत्पादक राज्यों से 262.30 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर हो चुकी है जोकि पिछले रबी विपणन सीजन 2023-24 में 260.71 लाख टन खरीद गए गेहूं से ज्यादा है।
मक्का के भाव तेज हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में बराबर बनी हुई है, इसलिए इसके भाव में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। सांगली मंडी में स्टार्च मक्का के भाव 2,450 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। चरखी दादरी में बाजरा का व्यापार 2,225 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
जौ के भाव तेज हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। राजस्थान की गंगानगर मंडी में जौ के भाव 1975 से 2002 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। जौ की कीमतों में आगे और तेजी बनेगी।
चीनी की कीमतों में सुधार आया है। व्यापारी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। महाराष्ट्र की चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है।
सरसों के दाम तेज होने की उम्मीद हैं। मलेशिया में पाम तेल के भाव तेज खुले हैं, साथ ही शिकागो में सोया तेल में तेजी आई है। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में सरसों की दैनिक आवकों में आगे और कमी आएगी, साथ ही उत्पादन उद्योग के अनुमान से कम रहने की उम्मीद है। आयातित खाद्वय तेल हैं, इसलिए सरसों की कीमतों में हल्का सुधार और आ सकता है। सरसों तेल के भाव 10 रुपये तेज हो गए, जबकि खल के दाम भी बढ़े हैं।
घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव में पांच से 10 रुपये की तेजी आई है। मलेशिया में अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम 21 रिगिंट तेज होकर भाव 3,915 रिगिंट प्रति हो गए, शिकागो में भी दाम तेज खुले हैं। अत: घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों भाव में हल्की तेजी और बन सकती है।
सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में तेज हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार घरेलू उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। ऐसे में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। शिकागो में सोयाबीन और सोया तेल और मील में तेजी आई है।
गुजरात में कैस्टर सीड के भाव 5 रुपये कमजोर होकर 1,100 से 1,120 रुपये प्रति 20 किलो रह गए तथा इसकी दैनिक आवक 1,15,000 बोरियों की हुई। राजकोट में कैस्टर तेल कमर्शियल के दाम 1,140 रुपये और एफएसजी के 1,150 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए।
घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें तीसरे दिन तेज हुई। विदेशी बाजार में बुधवार को कॉटन की कीमतों में लगातार दूसरे दिन 3 अंकों की तेजी आई थी। हालांकि आज आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में भाव कमजोर खुले हैं। उधर घरेलू बाजार से कॉटन के निर्यात में पड़ते नहीं लग रहे, साथ ही यार्न की स्थानीय मांग भी कमजोर है। इसके बावजूद भी इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।
बिनौला एवं कपास खली के भाव में हल्की नरमी आई है, लेकिन नीचे दाम पर बिकवाली कमजोर है, इसलिए मौजूदा कीमतों में सुधार बन सकता है। वैसे भी उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए कीमतों में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है
ग्वार सीड और ग्वार गम के दाम स्थिर हो गए। व्यापारी इनकी कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। हालांकि स्टॉकिस्ट दाम तेज करना चाहते हैं। ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य बनी हुई है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।