चना तेज, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम रुके, ग्वार गम एवं सीड में नरमी
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें तीसरे दिन 25 रुपये तेज खुली हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों की खरीद से चना में तेज बना हुआ है। उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की दैनिक आवक पहले की तुलना में काफी कम हो गई है, तथा चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है जिसे देखते हुए चना का भविष्य तो तेजी का ही है। हालांकि बाजार एकतरफा तेज नहीं होगा। अत: मुनाफावसूली आने पर खरीद करनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया से चना के आयात पड़ते भी महंगे हैं। दिल्ली में राजस्थान के चना के दाम 25 रुपये बढ़कर 7,075 से 7,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के दाम 7,025 से 7,050 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 5 से 6 मोटरों की हुई।
सोलापुर में अरहर के भाव स्थिर हो गए। उधर लेमन के दाम चेन्नई में डॉलर में स्थिर ही बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्ट अरहर की कीमतें तेज करना चाहते हैं, क्योंकि आयात पड़ते महंगे हैं। घरेलू बाजार में दाल मिलें बढ़े दाम जोखिम नहीं ले रही है, अत: जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है। वैसे भी बढ़े दाम पर अरहर दाल में उठाव नहीं बढ़ पा रहा है। सरकार दलहन की कीमतों की लगातार समीक्षा कर रही है। म्यांमार से लेमन का आयात बराबर हो रहा है, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट भी आ रही। ऐसे में इसके भाव में तेजी आने पर मुनाफावसूल करते रहना चाहिए। हालांकि देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है तथा उत्पादन अनुमान भी कम है। केंद्रीय पूल में अरहर का बकाया स्टॉक भी कम है। सोलापुर में अरहर के दाम 10,700 से 12,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक बढ़ी है, जबकि उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। वैसे भी उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक चालू महीने में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। म्यांमार से उड़द का आयात बराबर बना रहेगा, साथ ही म्यांमार में उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,175 डॉलर एफएक्यू के 1,085 डॉलर प्रति टन पर स्थिर हो गए।
मूंग के भाव दिल्ली में लगातार दो दिनों की तेजी के बाद स्थिर हो गए। व्यापारी इसकी कीमतों में अभी एकतरफा तेजी पक्ष में नहीं है। मूंग दाल में ग्राहकी कमजोर है इसलिए कीमतों में गिरावट आ सकती है। मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। मध्य प्रदेश की मंडियों में समर मूंग की आवक बढ़ने लगी है। दिल्ली में मूंग के दाम 8,550 से 8,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
देसी मसूर के साथ ही आयातित की कीमतें बुधवार को तेजी आई थी, जबकि आज देसी के दाम दिल्ली में स्थिर खुले हैं। मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की मंडियों में मसूर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है, साथ ही आयातित मसूर के पड़ते उंचे हैं। इसलिए इसके भाव में सुधार हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। केंद्रीय पूल में मसूर का पुराना स्टॉक भी अच्छा है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग जून में सामान्य की तुलना में कम रहेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,700 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
धान के साथ ही बासमती चावल के दाम स्थिर हो गए। जानकारों के अनुसार चावल की मौजूदा कीमतों में निर्यातकों की मांग कमजोर बनी हुई है हालांकि इन भाव में मिलों को भी नुकसान हो रहा है। इसलिए इसके भाव रुक सकते हैं। आगामी दिनों में साठी धान की आवक बढ़ेगी, उससे कीमतों पर दबाव बनेगा। जानकारों के अनुसार साठी की बुआई इस बार कम हुई है।
गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। गेहूं की आवक उत्पादक राज्यों में पहले की तुलना में कम हुई है, साथ ही स्टॉकिस्टों की खरीद में भी कमी आई है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है।
चालू रबी विपणन सीजन 2024-25 में प्रमुख उत्पादक राज्यों से 261.75 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर हो चुकी है जोकि पिछले रबी विपणन सीजन 2023-24 में 260.71 लाख टन खरीद गए गेहूं से ज्यादा है।
मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में बराबर बनी हुई है, इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। बिहार की गुलाबबाग मंडी में मक्का के भाव 2,100 से 2,170 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। पंजाब पहुंच बाजरा का व्यापार 2,350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
जौ के भाव तेज हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। उत्पादक मंडियों जौ के भाव 1950 से 2075 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। जौ की कीमतों में आगे और तेजी बनेगी।
चीनी की कीमतों में सुधार आया है। व्यापारी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। महाराष्ट्र की चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है।
सरसों के दाम तेज खुले हैं। मलेशिया में पाम तेल के भाव तेज हुए हैं, हालांकि शिकागो में सोया तेल में गिरावट आई है। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में सरसों की दैनिक आवकों में आगे कमी आयेगी, इसलिए सरसों की कीमतों में हल्का सुधार और आ सकता है। सरसों तेल के भाव 10 रुपये तेज हो गए, जबकि खल के दाम भी बढ़े हैं।
घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव में मिलाजुला रुख है। क्रूड पाम तेल के भाव 5 रुपये कमजोर हुए हैं, जबकि अन्य तेलों में पांच से 10 रुपये की तेजी आई है। मलेशिया में अगस्त महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम 23 रिगिंट तेज होकर भाव 3,891 रिगिंट प्रति हो गए, हालांकि शिकागो में दाम कमजोर खुले हैं। अत: घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों भाव में हल्की तेजी बन सकती है।
सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार घरेलू उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। ऐसे में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। शिकागो में सोयाबीन और सोया तेल में तेजी आई है, जबकि मील में मिलाजुला रुख है।
घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें दूसरे दिन तेज हुई। विदेशी बाजार में मंगलवार कॉटन की कीमतों में 3 अंकों की तेजी आई थी। हालांकि घरेलू बाजार से कॉटन के निर्यात में पड़ते नहीं लग रहे, साथ ही यार्न की स्थानीय मांग भी कमजोर है। इसके बावजूद भी इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।
बिनौला एवं कपास खली के भाव में सुधार आया है, व्यापारियों के अनुसार नीचे दाम पर बिकवाली कमजोर है, इसलिए मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार और भी बन सकता है। वैसे भी उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए कीमतों में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है
ग्वार सीड और ग्वार गम में नरमी आई है। व्यापारी इनकी कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। हालांकि स्टॉकिस्ट दाम तेज करना चाहते हैं। ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य बनी हुई है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।