एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 18 मई 2024

चना एवं अरहर तेज, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम रुके, ग्वार गम एवं सीड के स्थिर
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें 25 रुपये कमजोर खुली हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से भाव नरम हुए हैं, हालांकि इन भाव में जहां खरीददार गायब है, वहीं बिकवाली भी कम आ रही है। जानकारों के अनुसार इसके भाव में हल्की नरमी तो आ सकती है लेकिन बड़ी गिरावट के आसार कम है। वैसे भी उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की दैनिक आवक उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही, तथा चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है उसे देखते हुए चना का भविष्य तो तेजी का ही है। हालांकि बाजार एकतरफा तेज नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया से चना के आयात पड़ते भी महंगे हैं। दिल्ली में राजस्थान के चना के दाम 25 रुपये घटकर 6,800 से 6,825 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के दाम 25 रुपये नरम होकर 6,750 से 6,775 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 4 से 5 मोटरों की हुई।

सोलापुर में अरहर के भाव 100 रुपये तेज खुले हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्ट अरहर के दाम लगातार तेज कर रहे हैं हालांकि बढ़ी हुई कीमतों में अरहर दाल में उठाव नहीं बढ़ पा रहा। इसलिए इसके भाव में मुनाफावसूली आ सकती है। हालांकि अरहर के आयात पड़ते महंगे हैं जिस कारण आयातक दाम तेज कर रहे है। सरकार दलहन की कीमतों की लगातार समीक्षा कर रही है। उधर म्यांमार से लेमन का आयात बराबर हो रहा है, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट भी आ रही। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। इसलिए बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। दाल मिलर्स बढ़े दाम पर केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। सोलापुर में अरहर के दाम 10,700 से 12,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में चालू सप्ताह में तेज हुई है, हालांकि इसके अनुपात में घरेलू बाजार में दाम नहीं बढ़ पाये। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक बढ़ी है, जबकि उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में एकतरफा बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। वैसे भी उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक चालू महीने में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। म्यांमार से उड़द का आयात बराबर बना रहेगा, साथ ही म्यांमार में उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। हालांकि उड़द के आयात पड़ते महंगे हुए हैं, इसलिए इसकी कीमतों में हल्का सुधार बन सकता है, लेकिन बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 1,090 डॉलर और एसक्यू के 1,180 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर रहे।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए, जबकि पिछले दो दिनों से इसकी कीमतें तेज हुई थी, हालांकि व्यापारी एकतरफा बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। व्यापारियों के अनुसार मूंग दाल में ग्राहकी कमजोर है इसलिए इसकी मौजूदा कीमतों में मुनाफावसूली आ सकती है। मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। मध्य प्रदेश की मंडियों में समर मूंग की आवक बढ़ने लगी है। दिल्ली में मूंग के दाम 8,650 से 8,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों की खरीद से चालू सप्ताह में मसूर तेज हुई है, लेकिन व्यापारी अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। हालांकि मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की मंडियों में मसूर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है, साथ ही आयातित मसूर के पड़ते उंचे हैं। इसलिए इसके भाव में सुधार और भी बन सकता है। वैसे भी चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। केंद्रीय पूल में मसूर का पुराना स्टॉक भी अच्छा है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग जून में सामान्य की तुलना में कम रहेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,625 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें स्थिर हो गई। जानकारों के अनुसार बासमती चावल में जहां निर्यातक सीमित मात्रा में खरीद कर रहे हैं, वहीं बिकवाली भी कमजोर है। आगामी दिनों में साठी धान की आवक बढ़ेगी, इसलिए भाव घटेंगे। करनाल मंडी 1,847 किस्म के साठी धान का व्यापार 2,725 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2,490 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। उत्तर भारत के राज्यों में गेहूं की आवक पहले की तुलना में कम हुई है, साथ ही स्टॉकिस्टों की खरीद में भी कमी आई है। ऐसे में इसके भाव में हल्की नरमी और भी बन सकती है।

चालू रबी विपणन सीजन 2024-25 में प्रमुख उत्पादक राज्यों से 258.29 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर हो चुकी है। उत्पादक मंडियों में गेहूं की दैनिक आवक घटकर सीमित मात्रा में ही हो रही हैं।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारी मक्का में ज्यादा तेजी में नहीं है। रबी मक्का की आवक मंडियों में लगातार बनी हुई है, इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। हिम्मतनगर में स्टार्च मक्का के भाव 2,310 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। दाहोद मंडी में बाजरा का व्यापार 2,375 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। उत्पादक मंडियों जौ के भाव 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। जौ की कीमतों में आगे तेजी बनेगी।

चीनी की कीमतों में सुधार आया है। व्यापारी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। महाराष्ट्र की चीनी मिलों में पेराई बंद हो गई है।

सरसों के भाव रुक सकते हैं, हाल में इसकी कीमतों में लगातार तेजी आई है। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में सरसों की दैनिक आवकों में आगे कमी आयेगी, क्योंकि नीचे दाम पर स्टॉकिस्ट बिकवाली कम कर रहे हैं। ऐसे में सरसों की कीमतों में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है। सरसों तेल के भाव 20 रुपये तेज हुए हैं, जबकि खल भी तेज है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव में मिलाजुला रुख है। सरसों, सोया और पामोलीन तेज है, जबकि पाम तेल के दाम कमजोर हुए हैं। उधर ब्राजील और अर्जेंटीना से सोया तेल की सप्लाई प्रभावित होने से सोया तेल के दाम तेज हुए हैं, जिसका असर पाम तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। ऐसे में खाद्वय तेलों भाव में हल्की तेजी बन सकती है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में तेज हुए हैं, क्योंकि विदेशी बाजार में भाव बढ़े हैं। व्यापारियों के अनुसार घरेलू उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। ऐसे में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

गुजरात में कैस्टर सीड के भाव 10 रुपये कमजोर होकर 1,100 से 1,120 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। राजकोट में कैस्टर तेल कमर्शियल के दाम 1,145 रुपये और एफएसजी के 1,155 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में हल्का सुधार आया है। हालांकि हाल ही में विदेशी बाजार में कॉटन की कीमतों में मंदा आया है, जिस कारण निर्यात में पड़ते नहीं लग रहे। हालांकि घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, अत: मिलों को कॉटन की खरीद करनी होगी। लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव में हल्का सुधार आया है, व्यापारियों के अनुसार नीचे दाम पर बिकवाली कमजोर है, इसलिए मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार और भी बन सकता है। वैसे भी उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए कीमतों में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है

ग्वार सीड और ग्वार गम के दाम चालू सप्ताह में नरम हुए हैं। व्यापारी ग्वार गम और सीड में बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है लेकिन स्टॉकिस्ट दाम तेज करना चाहते हैं। ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य बनी हुई है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। हालांकि उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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