एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 9 मई 2024

मसूर तेज, चना के साथ ही अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम कमजोर, ग्वार गम एवं सीड के रुके
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें दूसरे दिन भी स्थिर हो गई। चना में जहां दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है, वही बिकवाली भी कमजोर है। इसलिए अभी इसके भाव में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की दैनिक आवक उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही, क्योंकि चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है इसलिए भविष्य तेजी का ही है। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 6,425 से 6,450 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 6,400 से 6,425 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 5 से 6 मोटरों की हुई।

सोलापुर में अरहर के दाम स्थिर ही बने हुए हैं। उधर चेन्नई में लेमन अरहर के दाम डॉलर में में भी पिछले दो दिनों से स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार अरहर के आयात पड़ते महंगे हैं इसलिए आयातक दाम तेज करना चाहते है, हालांकि बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। उधर म्यांमार से लेमन का आयात बराबर हो रहा है, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट भी आ रही। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। इसलिए बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। हालांकि घरेलू बाजार में दलहन की ऊंची कीमतों को लेकर केंद्र सरकार सजग है तथा हर सप्ताह कीमतों की समीक्षा कर रही है। ऐसे में दाल मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। सोलापुर में अरहर के दाम 10,700 से 11,850 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने हुए हैं।

आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में स्थिर बनी हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक चालू महीने में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, तथा म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 1,050 डॉलर और एसक्यू के 1,135 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर रहे।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए, जबकि बुधवार को जयपुर समेत कई मंडियों में दाम कमजोर हुए थे। व्यापारियों के अनुसार मूंग दाल में ग्राहकी कमजोर है इसलिए इसकी कीमतों में और भी गिरावट आने का अनुमान है, क्योंकि मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। छिंदवाड़ा मंडी में मूंग के भाव 6,800 से 8,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में 25 रुपये तेज हो गए, जबकि बुधवार को भाव में नरमी आई थी। मसूर में व्यापारी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मसूर दाल में ग्राहकी कमजोर है, जबकि मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की आवक बराबर बनी हुई है। वैसे भी चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। केंद्रीय पूल में मसूर का पुराना स्टॉक भी अच्छा है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग मई अंत के बाद कम हो जायेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,325 से 6,350 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई है। जानकारों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, इसलिए भाव में अभी तेजी नहीं बन पा रही है। हालांकि व्यापारी अभी ज्यादा मंदे के आसार नहीं है। गेहूं की सरकारी खरीद के कारण धान की आवक मंडियों में बंद है।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 15 रुपये कमजोर होकर 2,435 से 2465 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। उत्तर भारत के राज्यों में गेहूं की आवक पहले की तुलना में कम होने लगी है, क्योंकि स्टॉकिस्ट एवं मिलर्स के साथ ही सरकार खरीद हो रही है, हालांकि प्राइवेट खरीद में पहले की तुलना में कमी आई है।

चालू रबी विपणन सीजन 2024-25 में प्रमुख उत्पादक राज्यों से 239.03 लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर हो चुकी है। उत्पादक मंडियों में गेहूं की दैनिक आवक पहले की तुलना में कम हुई हैं ऐसे में खरीद तय लक्ष्य से कम होने की आशंका है।

मक्का के भाव स्थिर हो गए, व्यापारियों के अनुसार रबी मक्का की आवक मंडियों में लगातार बनी हुई है, इसलिए इसके भाव में नरमी आने का अनुमान है। सांगली में स्टार्च मक्का के भाव 2,330 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

बाजरा की कीमतों में सुधार आया है। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। पंजाब पहुंच बाजरा का व्यापार 2,290 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। राजस्थान की मंडियों में जौ के भाव 1600 से 1915 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।

चीनी की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। देशभर के राज्यों में अप्रैल अंत तक 315.90 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है तथा कुल उत्पादन 320 लाख टन होने का अनुमान है।

सरसों के भाव में नरमी आई है। उधर मलेशिया में पाम तेल में नरमी आई है, साथ ही शिकागो में सोया तेल के दाम स्थिर हो गए। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो सरसों की आवक बराबर बनी रहेगी। ऐसे में सरसों की कीमतों में हल्की नरमी बन सकती है। सरसों तेल के साथ ही खल में ग्राहकी कमजोर है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव में नरमी आई है। मलेशिया में जुलाई महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम 6 रिगिंट कमजोर होकर 3,863 रिगिंट प्रति टन रह गए। उधर शिकागो में भी सोया तेल के दाम स्थिर हैं। ऐसे में खाद्वय तेलों भाव में इनके भाव में हल्की नरमी बन सकती है, उधर ब्राजील में सोयाबीन की फसल को बाढ़ से जो नुकसान होने की आशंका थी, उसमें अब कमी आई है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में कमजोर हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार ब्राजील में सोयाबीन की फसल को नुकसान की आशंका पहले की तुलना में कम हुई है। वैसे भी घरेलू उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। ऐसे में हल्की तेजी बन सकती है। शिकागो में सोयाबीन और मील के दाम तेज हुए हैं, जबकि सोया तेल के स्थिर हैं।

गुजरात में कैस्टर सीड की आवक 1,65,000 बोरियों की हुई तथा इसके भाव 10 रुपये तेज होकर 1,080 से 1,105 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। राजकोट में कमर्शियल कैस्टर तेल के दाम पांच बढ़कर 1,130 रुपये और एफएसजी के दाम पांच रुपये बढ़कर 1,140 रुपये प्रति 10 किलो हो गए। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में उत्पादन अनुमान ज्यादा है तथा आगामी दिनों आवक और बढ़ेगी, इसलिए मौजूदा कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें तेज हो गई। विदेशी बाजार में बुधवार को लगातार दूसरे दिन कॉटन के भाव में तेजी आई थी। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, अत: मिलों को कॉटन की खरीद करनी होगी। लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव लगभग स्थिर हो गए, व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है साथ ही उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतें रुक गई। व्यापारी इनके भाव में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। ऐसे में ग्वार गम और सीड में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *