एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 3 मई 2024

चना में गिरावट, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं की कीमतें रुकी, ग्वार गम एवं सीड मंदा
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें 50 रुपये कमजोर हो गई। चना में दाल मिलें इन भाव में केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है, हालांकि बिकवाली भी कमजोर हुई है। इसलिए इसके भाव में हल्की और भी बन सकता है। उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की दैनिक आवक उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही, क्योंकि चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है इसलिए भविष्य तेजी का ही है। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 6,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 5 से 6 मोटरों की हुई।

सोलापुर में अरहर की कीमतें स्थिर ही बनी हुई। व्यापारियों के अनुसार म्यांमार से लेमन का आयात बराबर हो रहा है, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट भी आ रही। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। हालांकि अरहर के आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं इसलिए आयातक दाम तेज करना चाहते है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हुई है। इसलिए बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। हालांकि घरेलू बाजार में दलहन की ऊंची कीमतों को लेकर केंद्र सरकार सजग है तथा हर सप्ताह कीमतों की समीक्षा कर रही है। ऐसे में दाल मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 10,000 से 11,850 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में आज भी स्थिर हैं, हालांकि हाजिर बाजार में गुरूवार को इसके दाम तेज हुए थे। व्यापारियों के अनुसार उड़द के आयात पड़ते मंहगे है, इसलिए आयातक दाम तेज करना चाहते है, लेकिन उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक चालू महीने में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, तथा म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 1,050 डॉलर और एसक्यू के 1,140 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर रहे।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। जानकारों के अनुसार मूंग दाल में ग्राहकी कमजोर है इसलिए इसकी कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है, क्योंकि मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। छिंदवाड़ा मंडी में मूंग के दाम 6,800 से 8,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मसूर में ग्राहकी कमजोर है, जबकि मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की आवक बराबर बनी हुई है। वैसे भी चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी ही आने का अनुमान है। केंद्रीय पूल में मसूर का पुराना स्टॉक भी अच्छा है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग मई अंत के बाद कम हो जायेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,275 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें स्थिर हो गई। जानकारों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग बनी रहने की उम्मीद है तथा स्टॉकिस्टों को इन भाव में पड़ते नहीं लग रहे। इसलिए ज्यादा मंदे के आसार नहीं है। गेहूं की सरकारी खरीद के कारण धान की आवक मंडियों में बंद है। हरियाणा लाइन से 1,121 स्टीम चावल का व्यापार 8,800 रुपये इसके गोल्डन सेला का 8,400 रुपये तथा सेला का 7,600 से 7,650 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। 1,718 स्टीम चावल का व्यापार 8,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। उत्तर भारत के राज्यों में गेहूं की आवक पहले की तुलना में कम होने लगी है, क्योंकि स्टॉकिस्ट एवं मिलर्स के साथ ही सरकार खरीद हो रही है।

गेहूं की सरकारी खरीद 208.48 लाख टन की हो चुकी है, व्यापारियों के अनुसार गेहूं की कुल खरीद 270 से 280 लाख टन ही होने का अनुमान है।

मक्का के भाव स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार रबी मक्का की आवक मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने का अनुमान है। सांगली में स्टार्च मक्का का व्यापार 2,350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

बाजरा की कीमतें नरम हो गई। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। पंजाब पहुंच पोल्ट्री के बाजरा का व्यापार 2,200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। राजस्थानी की मंडियों में जौ के भाव 1600 से 1915 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।

चीनी की कीमतें रुकी हुई हैं। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है तथा देशभर के राज्यों में 15 अप्रैल तक 310.93 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।

सरसों के भाव स्थिर हो गए। उधर मलेशिया में पाम तेल में नरमी आई है, साथ ही शिकागो में सोया तेल के दाम कमजोर तेज खुले हैं। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो सरसों की आवक बराबर बनी रहेगी। ऐसे में सरसों की कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। सरसों तेल के साथ ही खल में ग्राहकी कमजोर है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव में मिलाजुला रुख है, जहां सोया तेल के दाम 3 रुपये तेज खुले हैं, वहीं पाम और सनफ्लावर में नरमी आई है। उधर मलेशिया में पाम तेल के दाम जुलाई वायदा अनुबंध में 17 रिगिंट कमजोर होकर 3,829 रिगिंट रह गए। उधर शिकागो में आज सोया तेल में मंदा आया है। इसलिए इनके भाव में तेजी के आसार नहीं है। जानकारों का मानना है कि विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में एकतरफा तेजी की उम्मीद नहीं है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन और और मील की कीमतों में तेजी आई है जबकि सोया तेल के दाम कमजोर खुले हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें स्थिर हो गई। हालांकि विदेशी बाजार में गुरुवार को भी कॉटन की कीमतें कमजोर हुई थी लेकिन आज इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में भाव तेज खुले हैं। घरेलू मिलों की मांग सीमित ही है। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, अत: मिलों को कॉटन की खरीद करनी होगी। लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव नरम बने हुए हैं, व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है साथ ही उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम के दाम दूसरे दिन कमजोर हो गए। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। ऐसे में ग्वार गम और सीड में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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