श्री अनिल चत्तर के अनुसार अप्रैल महीने मे किसानों ने मंडी में 11.50 लाख टन सरसोँ बेची है।
मॉर्च अप्रिल में किसानों ने नाफेड हैफेड को भी 13.90 लाख टन सरसोँ बेची है।
दो महीनों में किसान 40.90 लाख टन सरसो बेच चुके है, यह अभी तक कि सबसे बड़ी बिकवाली है। इसने 2022 सीजन में कि जब सरसोँ कि रिफाइनिंग बहुत तेज़ी से हो रही थी, को भी पीछे छोड़ दिया है।
मॉर्च में रिकॉर्ड 13 लाख टन क्रश के बाद अप्रैल में क्रश घटकर 9 लाख टन रह गया है। मॉर्च में क्रश बढने की वजह मार्किट में तेज़ी थी, तब सभी लिवाल बने हुए थे। इस साल मार्च अप्रैल का क्रश पिछले साल के बराबर है मगर दो साल पहले की क्रश से बहुत कम है।
एक्सपेलर आयल में यूरोसिक एसिड प्लांट्स की खरीदी गायब है, विदेश से यूरोसिक एसिड की कोई डिमांड नहीं है।
30 अप्रैल को किसानों के पास 79.60 लाख टन, मिल्स और ट्रेड के पास 5 लाख टन, हैफेड नाफेड के पास पुरानी मिलाकर 21.40 लाख टन सरसो स्टॉक है।