अरहर कमजोर, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम नरम, ग्वार गम एवं सीड में नरमी
नई दिल्ली। बढ़े दाम मिलों की मांग घटने से चना की कीमतें दिल्ली में स्थिर हो गई। हालांकि उत्पादक मंडियों में चना की आवकों का दबाव नहीं बन पा रहा, क्योंकि चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है। चना में नीचे दाम पर जहां स्टॉकिस्टों की खरीद बढ़ जाती है वहीं बढ़ी हुई कीमतों में मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है इसलिए कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहेगी। उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो चना की आवक अभी बनी रहेगी, तथा आवकों का देखते हुए दाल मिलें केवल जरूरत के हिसाब से ही चना की खरीद कर रहे हैं। ऐसे में भाव नीचे आने पर ही चना की खरीद करें। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 6,275 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 6,250 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 5 से 6 मोटरों की हुई।
सोलापुर में अरहर की कीमतें 50 रुपये कमजोर हुई हैं। पिछले दो दिनों से इसके दाम तेज हुए थे, साथ ही लेमन के दाम भी डॉलर में बढ़ गए थे। व्यापारियों के अनुसार अरहर के आयात पड़ते महंगे हैं इसलिए आयातक दाम तेज करना चाहते है। हालांकि घरेलू बाजार में दलहन की ऊंची कीमतों को लेकर केंद्र सरकार सख्त है। ऐसे में दाल मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हुई है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 10,000 से 11,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में स्थिर ही बनी हुई है, जबकि मंगलवार को एसक्यू में 5 डॉलर का मंदा आया था। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक अभी बनी हुई हैं साथ ही केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, तथा म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,170 डॉलर और एफएक्यू के 1,080 डॉलर प्रति टन पर स्थिर हो गए।
मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में सोमवार को नरम हुए थे, जबकि आज भाव रुक गए हैं। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मध्य प्रदेश की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम साफ रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। मध्य प्रदेश और गुजरात में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है। छिंदवाड़ा मंडी में गोदाम की मूंग का व्यापार 6,800 से 8,050 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो नई मसूर की आवकों में और बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी ही आने का अनुमान है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,275 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग बनी रहने की उम्मीद है इसलिए भाव में हल्का सुधार आ सकता है। हरियाणा लाइन से 1,509 स्टीम चावल का व्यापार 7500 रुपये और हरियाणा से पीआर 14 किस्म के सेला का व्यापार 4211 से 4225 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 15 रुपये कमजोर होकर 2430 से 2,445 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। उत्तर भारत के राज्यों में मौसम साफ हुआ है इसलिए नए गेहूं की आवक आगामी दिनों में बढ़ेगी। इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आ सकती है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में गेहूं की आवक 5,000 बोरी की हुई।
मक्का के भाव आज भी स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार रबी मक्का की आवक मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने का अनुमान है। सांगली में स्टार्च मक्का के भाव 2,385 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई, बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। चरखी दादरी में बाजरा का व्यापार 2,280 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
जौ के भाव स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवक अभी बराबर बनी हुई है साथ ही स्टॉकिस्टों की खरीद भी बनी हुई है। हालांकि अभी इसके भाव में बड़ी तेजी की उम्मीद नही है। मंडियों में जौ के भाव 1550 से 1750 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
चीनी की कीमतें रुकी हुई हैं। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है। देश में 15 अप्रैल तक 310.93 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।
सरसों के भाव में नरमी आई है। हालांकि मलेशिया में पाम तेल में हल्का सुधार आया है, लेकिन शिकागो में सोया तेल के दाम कमजोर खुले हैं। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नई सरसों की आवक अभी बराबर बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में हल्की तेजी तो आ सकती है लेकिन अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। सरसों तेल एवं खल में भी ग्राहकी कमजोर है।
घरेलू बाजार में पाम तेलों के भाव पांच रुपये कमजोर खुले हैं, जबकि अन्य तेलों के दाम स्थिर हैं। मलेशिया में पाम तेल के दाम जुलाई वायदा अनुबंध के 5 रिगिंट तेज होकर 3,976 रिगिंट प्रति टन हो गए। शिकागो में भी सोया तेल में मंदा आया है। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। अत: घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।
सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन और मील के दाम तेज खुले हैं, जबकि सोया तेल में गिरावट का रुख है।
घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें दूसरे दिन स्थिर हो गई। विश्व बाजार में आज कॉटन के दाम कमजोर खुले हैं, जिस कारण घरेलू मिलों की खरीद सीमित बनी हुई है। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, अत: मिलों को कॉटन की खरीद करनी होगी। हालांकि इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।
बिनौला एवं कपास खली के भाव में नरमी आई है, व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।
ग्वार सीड और ग्वार गम के दाम कमजोर खुले हैं। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। ऐसे में ग्वार गम और सीड में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।