एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 10 अप्रैल 2024

चना एवं अरहर तेज, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम स्थिर, ग्वार गम एवं सीड में मंदा
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें 50 से 75 रुपये तेज हुई है, तथा मंगलवार को शाम को भी इसके दाम बढ़े थे। चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है इसलिए स्टॉकिस्ट इसके दाम तेज कर रहे हैं, हालांकि अभी एकतरफा बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो चना की आवक बढ़ेगी तथा दाल मिलें केवल जरूरत के हिसाब से ही चना की खरीद कर रहे हैं। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 75 रुपये तेज होकर 6,025 से 6,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 50 रुपये तेज होकर 5,975 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। चना की दैनिक आवक 5 से 6 मोटरों की हुई।

जयपुर मंडी में मोठ के बिल्टी भाव 6,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 200 रुपये तेज खुली हैं। बर्मा से चेन्नई पहुंच लेमन अरहर की कीमतें आज स्थिर है। जानकारों के अनुसार अरहर के आयात पड़ते महंगे है, अत: आयातक इसके दाम तेज कर रहे हैं। हालांकि बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए क्योंकि आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। घरेलू बाजार में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रही है क्योंकि अरहर दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। उधर केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 10,500 से 11,850 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बर्मा से आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में स्थिर हो गई जबकि मंगलवार को इसके दाम नरम हुए थे। जानकारों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक बनी हुई हैं। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, वैसे भी म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं। बर्मा से चेन्नई के लिए उड़द एसक्यू के दाम 1,165 डॉलर एवं एफएक्यू के 1,070 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में अभी भी स्थिर बने रहे। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मौसम साफ है इसलिए उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। दाहोद मंडी में नई मूंग के भाव 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।  

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो नई मसूर की आवकों में और बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार चावल में निर्यात मांग अभी बनी रहने की उम्मीद है इसलिए इनके भाव में आगे सुधार आने की उम्मीद है। गेहूं की सरकारी खरीद के कारण उत्पादक मंडियों में धान की दैनिक आवक लगभग बंद हो गई है। टोहाना मंडी में 1,718 किस्म के धान का भाव 4,400 रुपये और रतिया मंडी में 1401 का 4,300 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2425 से 2,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। मौसम अनुकूल रहा तो उत्तर भारत के राज्यों में नए गेहूं की आवक आगामी दिनों में और बढ़ेगी, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी हुई है।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक बिहार की मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए इसके भाव में आगे और नरमी आने का अनुमान है। सांगली मंडी में मक्का के बिल्टी भाव 2,350 से 2,400 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। हालांकि व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, वैसे भी मंडियों में आवक काफी कम हो रही है। बाराबंकी में बाजरा का व्यापार 2,340 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थिर हो गए। उत्पादक मंडियों में जौ की नई फसल की आवक बराबर बनी हुई है, तथा आगामी दिनों में आवक और बढ़ेगी, इसलिए मौजूदा भाव में नरमी आने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में जौ के भाव 1550 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटी अनुसार रहे।

चीनी के दाम स्थिर हो गए। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

कैस्टर सीड के दाम गुजरात में लगातार पांचवें कार्यदिवस में पांच रुपये कमजोर होकर 1,130 से 1,160 रुपये प्रति 20 किलो रह गए, तथा दैनिक आवक 1,60,000 बोरियों की हुई। उधर राजकोट में कैस्टर तेल कर्मिशय के दाम 1 रुपये कमजोर होकर 1,182 रुपये तथा एफएसजी के एक रुपये घटकर 1,192 रुपये प्रति 10 किलो रह गए।

सरसों के भाव स्थिर हो गए। मलेशिया में अवकाश है, जबकि शिकागो में सोया तेल में तेजी आई है। उधर उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नई सरसों की आवक अभी बराबर बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। सरसों तेल के साथ ही खल के दाम स्थिर बने हुए हैं।

घरेलू बाजार में पाम तेल के दाम पांच रुपये कमजोर है, जबकि अन्य खाद्वय तेलों के दाम स्थिर हो गए। उधर मलेशिया में अवकाश है। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। अत: घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में बढ़ गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में सोयाबीन के भाव में हल्का सुधार बन सकता है लेकिन ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है क्योंकि उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन सोया तेल और मील में तेजी आई है।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें नरम हो गई, क्योंकि विश्व बाजार में मंगलवार को इसके भाव में मंदा आया था, हालांकि व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है। जानकारों के अनुसार कॉटन में स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने की उम्मीद है, क्योंकि मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। इसलिए आगे फिर भाव में सुधार बनने की उम्मीद है।

बिनौला एवं कपास खली के भाव में नरमी आई है। व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, साथ ही उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतें कमजोर हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों के इसके दाम तेज किए थे, लेकिन मांग का समर्थन नहीं मिलने के कारण तेजी टिक नहीं पाई। वैसे भी ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। हालांकि पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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