स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द एवं अरहर के साथ ही चना महंगा, देसी मसूर कमजोर

नई दिल्ली। बर्मा से आयात पड़ते महंगे होने के साथ ही स्टॉकिस्टों की सक्रियता से घरेलू बाजार में शनिवार को आयातित उड़द के साथ ही अरहर एवं चना की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान मूंग तथा मसूर एवं पीली मटर की कीमतों में गिरावट आई। 

बर्मा से आयातित चेन्नई पहुंच उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव 20-30 डॉलर तेज हो गए। इस दौरान लेमन अरहर की कीमतें 25 डॉलर बढ़ गई। उड़द एफएक्यू के भाव अप्रैल एवं मई शिपमेंट के 20 डॉलर बढ़कर 1,085 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के भाव 30 डॉलर तेज होकर 1,180 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए। चेन्नई में लेमन अरहर के दाम 25 डॉलर तेज होकर भाव 1,345 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए।

बर्मा से चेन्नई पहुंच उड़द के दाम डॉलर में तेज हुए हैं, जिस कारण घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई। व्यापारियों के अनुसार आयातित डिस्पैरिटी में बिक रही है, इसलिए आयातक भाव तेज कर रहे हैं। अत: इसकी कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकती है लेकिन बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। इसलिए कीमतें तेज होने पर मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। वैसे भी उड़द दाल में दक्षिण भारत की सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक अभी बनी रहने का अनुमान है। उधर म्यांमार में नई उड़द की आवक बढ़ने से आगामी दिनों में आयात बढ़ेगा, तथा बर्मा में उड़द का उत्पादन अनुमान ज्यादा है। केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है।

अरहर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, क्योंकि बर्मा से चेन्नई पहुंच लेमन की कीमतें डॉलर में तेज हुई है। जानकारों के अनुसार अरहर के आयात पड़ते महंगे हैं, जिस कारण आयातक इसकी कीमतों में तेजी करना चाहते हैं। हालांकि बढ़ी हुई कीमतों में अरहर दाल में थोक के साथ ही खुदरा में ग्राहकी उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही है, वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार के साथ ही अफ्रीकी देशों से अरहर का आयात बढ़ेगा। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि घरेलू मंडियों में देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है वैसे भी प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में अरहर के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है।

स्टॉकिस्टों की सक्रियता से चना की कीमतें तेज हुई है। व्यापारियों के अनुसार चालू सप्ताह में इसके भाव में तेजी, मंदी बनी रही। हालांकि उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नए चना की आवक आगामी दिनों में और बढ़ेगी, तथा चना के दाम उत्पादक मंडियों में समर्थन मूल्य से ऊपर है, जिस कारण मौजूदा कीमतों में दाल मिलें जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आवकों का दबाव बनने पर कीमतों में हल्की नरमी आ सकती है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी, तथा चना का उत्पादन अनुमान कम है।

केंद्र सरकार ने पीली मटर के आयात की समय सीमा को जून अंत तक बढ़ा दिया है। इसलिए कीमतों पर दबाव देखा गया। मुंबई में कनाडा की पीली मटर के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 4,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर रसिया की पीली मटर के दाम 25 रुपये घटकर 4,125 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मुंद्रा बंदरगाह पर रसिया की पीली मटर के भाव 25 रुपये कमजोर होकर दाम 4,100 से 4,125 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। कानपुर में देसी मटर के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 4,400 से 4,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

कनाडा से 59,306 टन पीली मटर लेकर एक जहाज पांच अप्रैल को मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया।

दिल्ली में देसी मसूर की कीमतें तीसरे दिन कमजोर हुई है, हालांकि बंदरगाह पर आयातित के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार नई फसल की आवक लगातार बढ़ रही है, इसलिए आगे मंदा मानकर ही व्यापार करना चाहिए। मौसम अनुकूल रहा तो आगामी दिनों में मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश की मंडियों में नई फसल की आवकों का दबाव बनेगा। वैसे भी चालू रबी में मसूर की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। ऐसे में मसूर का स्टॉक हल्का करना चाहिए।

मूंग के भाव जयपुर में कमजोर हुए है जबकि अन्य मंडियों में स्थिर बने रहे। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, वैसे भी रबी सीजन में इसकी बुआई पिछले साल की तुलना में कम हुई थी, जिस कारण उत्पादन अनुमान कम है। हालांकि उत्पादक राज्यों में आगामी दिनों में नई मूंग की दैनिक आवक बढ़ेगी। इसलिए मौजूदा कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है। चालू समर सीजन में मूंग की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है।

चेन्नई में एसक्यू उड़द फसल सीजन 2023/24 के दाम शाम के सत्र में तेज होकर 9,650 से 9,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान एफएक्यू के दाम तेज होकर 9,200 से 9,225 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में एसक्यू उड़द फसल सीजन 2023/24 के दाम 75 रुपये तेज होकर 10,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान एफएक्यू के दाम बढ़कर 9,650 से 9,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के दाम 150 रुपये तेज होकर भाव 9,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

इंदौर मंडी में बोल्ड उड़द के भाव 8,100 से 8,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

चेन्नई में लेमन अरहर के दाम फसल सीजन 2024 के दाम तेज होकर 10,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

देसी अरहर की कीमतें सोलापुर, इंदौर, लातूर और कटनी में तेज हुई।

मुंबई में लेमन अरहर के दाम शाम के सत्र में 150 रुपये बढ़कर 10,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में लेमन अरहर के दाम शाम के सत्र में बढ़कर 11,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें तेज हुई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 200 रुपये बढ़कर 10,800 से 10,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 150 रुपये बढ़कर 9,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मतवारा अरहर के भाव 100 रुपये तेज होकर 9,700 से 9,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सफेद अरहर की कीमतें 100 रुपये बढ़कर 10,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

दिल्ली में देसी मसूर के दाम 75 रुपये कमजोर होकर भाव 6,275 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 5,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। मुंद्रा बंदरगाह पर मसूर के भाव 6,025 रुपये और हजीरा बंदरगाह पर 6,075 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इंदौर में देसी मसूर के बिल्टी दाम 6,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में राजस्थान लाइन के नए चना के दाम 50 रुपये तेज होकर 5,875 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश लाइन के नए चना के भाव 50 रुपये बढ़कर 5,825 से 5,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

जयपुर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 8,300 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इंदौर में बोल्ड मूंग के दाम घटकर 8,100 से 8,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। जलगांव मंडी में पुरानी समर मूंग के दाम 8,800 से 9,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

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