एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 6 अप्रैल 2024

चना एवं अरहर तेज, मसूर मंदी तथा अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं में नरमी जारी, ग्वार गम एवं सीड के दाम रुके
नई दिल्ली। दिल्ली में राजस्थानी चना की कीमतें स्थिर बनी रही, जबकि मध्य प्रदेश के चना के भाव में 25 रुपये का सुधार आया है। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्ट चना के दाम तेज करना चाहते हैं, हालांकि केंद्र सरकार पीली मटर के आयात की अवधि को जून तक बढ़ा दिया है, जिससे इसका आयात बना रहेगा। हालांकि उत्पादक राज्यों में मौसम रहता तो मंडियों में चना की आवक अभी बनी रहेगी तथा दाल मिलें केवल जरूरत के हिसाब से ही चना की खरीद कर रहे हैं। ऐसे में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है।

दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 5,825 से 5,850 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 25 रुपये बढ़कर 5,800 से 5,825 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। चना की दैनिक आवक 9 से 10 मोटरों की हुई।

बीकानेर मंडी में मोठ के भाव 6,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 300 रुपये तेज खुली हैं। बर्मा से चेन्नई पहुंच लेमन अरहर की कीमतें चालू सप्ताह में तेज हुई हैं, जिस कारण इसके आयात पड़ते महंगे हैं। इसीलिए आयातक इसके दाम तेज करना चाहते हैं, लेकिन मिलों का मांग समर्थन नहीं मिल पा रहा, जिस कारण तेजी टिक नहीं पा रही है। ऐसे में बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। घरेलू बाजार में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रही है क्योंकि अरहर दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। उधर केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 9,500 से 11,200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बर्मा से आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में स्थिर हो गई। जानकारों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक बनी हुई हैं। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, वैसे भी म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं। बर्मा से चेन्नई के लिए उड़द एसक्यू के दाम 1,150 डॉलर एवं एफएक्यू के 1,065 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए।  

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में अभी भी स्थिर बने रहे। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मौसम साफ है इसलिए उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। दाहोद मंडी में मूंग के दाम 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।  

देसी मसूर के दाम दिल्ली में 50 रुपये कमजोर हो गए। मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो नई मसूर की आवकों में और बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार चावल में निर्यात मांग अभी बनी रहने की उम्मीद है इसलिए इनके भाव में आगे सुधार आने की उम्मीद है। अमृतसर मंडी में 1,121 किस्म के धान का भाव 4100 से 4630 रुपये तथा 1,718 किस्म के धान के दाम 4100 से 4,600 रुपये तथा मीडियम माल 3,200 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल रहे। रतिया मंडी में 1,401 किस्म के धान के भाव 4,351 रुपये, 1,847 के 3361 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 10 रुपये कमजोर होकर 2470 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मौसम अनुकूल रहा तो उत्तर भारत के राज्यों में नए गेहूं की आवक आगामी दिनों बढ़ेगी, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी हुई है।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक बिहार की मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए इसके भाव में आगे नरमी आने का अनुमान है। चालीसगांव मंडी में स्टार्च मक्का के भाव 2,275 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। हालांकि व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, वैसे भी मंडियों में आवक काफी कम रह गई है। चरखी दादरी मंडी में बाजरा का व्यापार 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थिर हो गए। उत्पादक मंडियों में जौ की नई फसल की आवक बढ़ी है, तथा आगामी दिनों में आवक और बढ़ेगी, इसलिए आगे इसके दाम घटने की उम्मीद है। उत्पादक मंडियों में जौ के भाव 1500 से 1,850 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटी अनुसार चल रहे हैं।

चीनी के दाम स्थिर हो गए। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। इस्मा ने केंद्र सरकार से 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने की मांग की है, क्योंकि चीनी के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी हुई है।

कैस्टर सीड के दाम गुजरात में दूसरे दिन 10 रुपये कमजोर होकर 1,150 से 1,175 रुपये प्रति 20 किलो रह गए, तथा दैनिक आवक 1,15,000 बोरियों की हुई। उधर राजकोट में कैस्टर तेल कमर्मिशय के दाम 12 रुपये कमजोर होकर 1,198 रुपये तथा एफएसजी के 12 रुपये घटकर 1,208 रुपये प्रति 10 किलो रह गए।

सरसों के भाव में नरमी आने की उम्मीद है। मलेशिया में चालू सप्ताह के अंत में पाम तेल के दाम कमजोर हुए थे जबकि उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नई सरसों की आवक अभी बराबर बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में नरमी आने का अनुमान है। सरसों तेल के दाम 10 रुपये कमजोर हो गए, जबकि खल के दाम स्थिर बने हुए हैं।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के दाम 5 से 10 रुपये कमजोर खुले हैं। मलेशिया में चालू सप्ताह के अंत में पाम तेल वायदा अनुबंध में गिरावट आई थी। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में मुनाफावसूली से हल्की नरमी और भी आ सकती है, अत: घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में भी नरमी बनी रह सकती है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में इसके भाव में अभी ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है क्योंकि उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमते स्थिर हो गई, चालू सप्ताह में विदेशी बाजार में कॉटन वायदा में गिरावट आई है, जिस कारण घरेलू मिलों की मांग कमजोर हुई है। व्यापारियों के अनुसार कॉटन में स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने की उम्मीद है, क्योंकि मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। इसलिए एकतरफा बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।

बिनौला और कपास खली के भाव कमजोर खुले हैं। व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, साथ ही  उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी हल्की तेजी और भी बन सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतें स्थिर हो गई, जानकारों के अनुसार चालू सप्ताह में स्टॉकिस्टों ने इनके दाम तेज किए थे, लेकिन इसकी कीमतों में एकतरफा तेजी टिक नहीं पायेगी। वैसे भी ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथ प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। हालांकि पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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