एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 30 मार्च 2024

चना के साथ ही अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव में नरमी, ग्वार गम एवं सीड में सुधार
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारी अभी चना में बड़ी तेजी में नहीं है। उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नए चना की आवक अगले सप्ताह से बढ़ जायेगी। इसी को देखते हुए दाल मिलर्स जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। आगामी दिनों में नई फसल की आवकों का दबाव बनने पर मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट जाने की उम्मीद है इसलिए इन भाव में खरीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है।

दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 5,775 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 5,725 से 5,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। चना की दैनिक आवक 4 से 5 मोटरों की हुई।

जयपुर मंडी में मोठ के बिल्टी भाव कमजोर होकर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाहोद में अरहर की कीमतें स्थिर ही बनी रही। चेन्नई में इसके भाव डॉलर में तेज खुले हैं। व्यापारियों के अनुसार लेमन के आयात पड़ते महंगे हुए है जिसकी वजह से आयातक इसके भाव में हल्की तेजी तो कर सकते है, लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। घरेलू बाजार में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रही है क्योंकि अरहर दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। उधर केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। दाहोद मंडी में देसी अरहर के भाव 8,400 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चेन्नई पहुंच लेमन अरहर के दाम 1,275 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए।

आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में तेज खुली हैं। अत: घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों में हल्का सुधार आ सकता है। हालांकि उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक बनी हुई हैं। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बढ़ेगी, लेकिन साथ ही आगामी दिनों में म्यांमार से आयात ज्यादा होगा, वैसे भी म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। बर्मा से चेन्नई के लिए उड़द एसक्यू के दाम 1,125 डॉलर एवं एफएक्यू के 1,035 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।  

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मौसम साफ है इसलिए उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। दाहोद में नई मूंग के दाम 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।  

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो अप्रैल के पहले सप्ताह में नई मसूर की आवकों में बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी आने का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,275 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के भाव में शुक्रवार को नरमी आई थी, लेकिन आज दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मिलों के पास धान का स्टॉक कम है, जबकि चावल में निर्यात मांग बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए भाव में ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। सिरसा मंडी में 1,401 किस्म के धान का भाव 3,800 से 4,348 रुपये तथा पीबी 1 किस्म के धान के दाम 3,858 रुपये तथा रतिया मंडी में 1,401 किस्म के धान के भाव 4,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। गोहाना में 1,121 किस्म के धान के भाव 4,425 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 10 रुपये कमजोर होकर दाम 2525 से 2540 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मौसम अनुकूल रहा तो उत्तर भारत के राज्यों में नए गेहूं की आवक सप्ताह भर में शुरू हो जाएगी, इसलिए इसके भाव में नरमी आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी हुई है।

केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने व्यापारियों, ट्रेडर्स, मिलर्स एवं बड़ी चेन रिटेलरों को हर सप्ताह गेहूं के स्टॉक की जानकारी केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया है।

मक्का के भाव स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक बिहार की मंडियों में पहले की तुलना में बढ़ गई है, तथा आगामी दिनों में इसकी आवक और बढ़ेगी, इसलिए इसके भाव में आगे नरमी आने का अनुमान है। मुजफ्फरनगर मंडी में स्टार्च मक्का के भाव 2,375 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में बाजरे की आवक काफी कम हो रही है, इसलिए इसके भाव में ज्यादा मंदे के आसार नहीं हैं। चरखी दादरी मंडी में बाजरा का व्यापार 2,325 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव रुक गए हैं। उत्पादक मंडियों में जौ की नई फसल की आवक हो रही है, तथा आगामी दिनों में आवक और बढ़ेगी, इसलिए आगे इसके दाम घटने की उम्मीद है। चरखी दादरी मंडी में जौ के भाव 1,850 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

चीनी के दाम स्थिर बने हुए है। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों  का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि केंद्र सरकार ने मार्च के लिए चीनी का कोटा ज्यादा मात्रा में जारी किया है।

सरसों के भाव रुकने की उम्मीद है। मलेशिया में चालू सप्ताह के अंत में पाम तेल में सुधार आया था। उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नई सरसों की आवक बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है है। सरसों तेल के दाम 10 रुपये तेज हुए हैं, जबकि खल में मांग कमजोर है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के दाम 5 से 15 रुपये तेज हो गए। मलेशिया में पाम तेल वायदा अनुबंध में शुक्रवार को सुधार आया था। हालांकि विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है, इसलिए घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में अभी ज्यादा तेजी नहीं आयेगी।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में इसके भाव में अभी ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें स्थिर हो गई। मार्च क्लोजिंग के कारण कॉटन की खरीद स्पिनिंग मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही कर रही है, हालांकि मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। ऐसे में अप्रैल में कॉटन की खरीद बढ़ने की उम्मीद है।

बिनौला और कपास खली के भाव में सुधार आया है। व्यापारियों के अनुसार नीचे दाम पर बिकवाली घटी है, हालांकि तेल मिलें बिनौला की खरीद केवल जरुरत के हिसाब से ही कर रही है। उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों में सुधार आया है। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए इसकी कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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