एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 29 मार्च 2024

चना में मिलाजुला रुख, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव दूसरे दिन तेज, ग्वार गम एवं सीड में सुधार
नई दिल्ली। दिल्ली में राजस्थानी चना की कीमतें स्थिर हो गए, जबकि मध्य प्रदेश के दाम 25 रुपये कमजोर हुए। व्यापारी अभी चना में बड़ी तेजी में नहीं है। उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नए चना की आवक अगले सप्ताह से बढ़ जायेगी। इसी को देखते हुए दाल मिलर्स जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। आगामी दिनों में नई फसल की आवकों का दबाव बनने पर मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट जाने की उम्मीद है इसलिए इन भाव में खरीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है।

दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 5,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 25 रुपये घटकर 5,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। चना की दैनिक आवक 4 से 5 मोटरों की हुई।

जयपुर मंडी में मोठ के बिल्टी भाव कमजोर होकर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें स्थिर ही बनी रही। उधर चेन्नई में इसके भाव डॉलर में गुरूवार को स्थिर थे। व्यापारियों के अनुसार लेमन के आयात पड़ते महंगे हैं, इसलिए आयातक इसके भाव में हल्की तेजी तो कर सकते है, लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। घरेलू बाजार में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रही है क्योंकि अरहर दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। उधर केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 9,500 से 10,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में स्थिर ही बनी हुई हैं। घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी देखी जा रही है। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक बनी हुई हैं। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बढ़ेगी, लेकिन साथ ही आगामी दिनों में म्यांमार से आयात ज्यादा होगा, वैसे भी म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। बर्मा से चेन्नई के लिए उड़द एसक्यू के दाम 1,110 डॉलर एवं एफएक्यू के 1,025 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।  

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मौसम साफ है इसलिए उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। दाहोद में नई मूंग के दाम 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।  

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए, पिछले दो दिनों से इसकी कीमतों में नरमी आई थी। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो सप्ताह भर में नई मसूर की आवकों में बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी आने का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,200 से 6,225 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के भाव में हल्की नरमी आई है, हालांकि व्यापारी ज्यादा मंदे में नहीं है। मिलों के पास धान का स्टॉक कम है, जबकि चावल में निर्यात मांग बनी रहने की उम्मीद है। सिरसा मंडी में 1,401 किस्म के धान का भाव 3,800 से 4,264 रुपये तथा पीबी 1 किस्म के धान के दाम 3,850 रुपये तथा रतिया मंडी में 1,401 किस्म के धान के भाव 4,305 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 15 रुपये तेज होकर दाम 2525 से 2550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि व्यापारी ज्यादा तेजी में नहीं है। मौसम अनुकूल रहा तो उत्तर भारत के राज्यों में नए गेहूं की आवक अगले आठ से दस दिनों बाद शुरू हो जाएगी, इसलिए इसके भाव में आगे फिर नरमी आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवक अब बढ़ेगी।

केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने व्यापारियों, ट्रेडर्स, मिलर्स एवं बड़ी चेन रिटेलरों को हर सप्ताह गेहूं के स्टॉक की जानकारी केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया है।

मक्का के भाव स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार रबी मक्का की आवक बिहार की मंडियों में शुरू हो गई है, तथा आगामी दिनों में इसकी आवक और बढ़ेगी, इसलिए इसके भाव में आगे नरमी आने का अनुमान है। हिम्मतनगर मंडी में स्टार्च मक्का के भाव 2,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में बाजरे की आवक काफी कम हो रही है, इसलिए इसके भाव में ज्यादा मंदे के आसार नहीं हैं। पंजाब पहुंच पोल्ट्री फीड क्वालिटी के बाजरा का व्यापार 2,420 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव रुक गए हैं। उत्पादक मंडियों में जौ की नई फसल की आवक हो रही है, तथा आगामी दिनों में आवक और बढ़ेगी, इसलिए आगे इसके दाम घटने की उम्मीद है।

चीनी के दाम स्थिर बने हुए है। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों  का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि केंद्र सरकार ने मार्च के लिए चीनी का कोटा ज्यादा मात्रा में जारी किया है।

सरसों के भाव रुकने की उम्मीद है। शिकागो में अवकाश है, जबकि मलेशिया में पाम तेल में सुधार आया है। उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल है, इसलिए नई सरसों की आवक बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है है। सरसों तेल एवं खल में मांग कमजोर है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों में मिलाजुला रुख है। सोया तेल पांच रुपये नरम हुआ है जबकि पाम तेल के दाम 5 रुपये तेज खुले हैं। मलेशिया में जून महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम 25 रिगिंट तेज होकर भाव 4,161 रिगिंट प्रति टन हो गए। अवकाश के कारण शिकागो बंद है। विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है, इसलिए घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में अभी ज्यादा तेजी नहीं आयेगी।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में इसके भाव में अभी ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में हल्का सुधार आया हैं, विदेशी बाजार में गुरुवार को कॉटन की कीमतें तेज होकर बंद हुई थी। अत: घरेलू मिलों की खरीद में सुधार आया है। हालांकि मार्च क्लोजिंग के कारण व्यापार अभी सीमित मात्रा में हो रहा है, लेकिन अप्रैल में कॉटन में मिलों की खरीद बढ़ने की उम्मीद है।

बिनौला और कपास खली के भाव स्थिर हो गए, तेल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही बिनौला की खरीद कर रही है, लेकिन उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतें उत्पादक मंडियों में लगभग स्थिर बनी हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार प्लांटों के पास ग्वार सीड का बकाया स्टॉक ज्यादा है। जबकि ग्वार गम उत्पादों का निर्यात चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी के दौरान घटकर 3.39 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 3.50 लाख टन का हुआ था। ऐसे में इसकी कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

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