लगता है 20 फ़रवरी से शुरू हुई तेलों की तेजी अब शांत होने लगी है। तेज़ी की वजह मलसिया में पाम आयल सप्लाई घटने, ब्राज़ील अर्जेटिना में किसानों की धीमी सोय्या बिकवाली थी या भारत मे पोर्टस पर स्टॉक की कमी। विदेशी और देसी बाज़ार एक समान रफ्तार से बढ़े तो यह कहना मुश्किल हुआ कि तेज़ी के पीछे कौन। लेकिन यह भी सच है कि कांड़ला में खाली होते जा रहे टैंक्स को विदेशी suppliers ने नोटिस किया और मार्किट तेज़ होती गई।
एक महीने चली तेज़ी में ट्रेड ने स्टॉक भरे और अब हाई प्राइस के स्टॉक में बिकवाली कर रहे है।
फंड्स और विदेशी सप्लायर अब किसी नए लीड के इंतज़ार में है मगर साउथ अमेरिका में सोयाबीन के बड़े स्टॉक इक्कठे होने और मलेशिया में उतपादन बढ़ने की चर्चा से फंड्स ने मुनाफा वसूली शुरू की है। पाम सन की सप्लाई टाइट समझी जा रही है, इस कारण विदेश में इनके भाव टिके हुए है।
दो दिन में मार्किट टूटी है-
Klc 92 रिंगित, 25 डॉलर नीचे आई है
सीबोट 128 पॉइंट टूटा है
कांड़ला में हाई सीज सोय्या ढाई रुपए किलो, सीपीओ 2 रुपए किलो नीचे आया है।
सोयबीन मील 1000 रुपए टूटी है
कांड़ला में ओलिन 2 रुपए किलो, इंदौर रिफाइंड डेढ़ रुपए नीचे आया है। सरसोँ में 175 रुपए निकले तो कोल्हू तेल 3 रुपए किलो डाउन हुआ है।
कॉटन वाश आयल 2 रुपए किलो, कोलकाता चावल रिफाइंड भी इतना ही नीचे आया है।
विदेश में सन आयल रुका हुआ है तो काकीनाडा सन रिफाइंड में थोड़ी ही मंदि आई।
लोकल मार्केट्स में अब रेसीलर्स हावी हुए है।