एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 2 मार्च 2024

चना, अरहर एवं मसूर तेज, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव स्थिर, ग्वार गम एवं सीड में नरमी
नई दिल्ली। दिल्ली में चना के दाम 50 रुपये तेज हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ जगह बारिश हुई तथा अभी भी मौसम खराब है। इसलिए चना के दाम तेज हो रहे हैं। जानकारों के अनुसार मौसम साफ होने के बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश में नई फसल की आवक बढ़ेगी, जिसे देखते हुए मिलर्स जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। अत: बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है, तथा मंडियों में अच्छी क्वालिटी का पुराना चना कम है। दिल्ली में राजस्थान के चना के भाव 50 रुपये तेज होकर 6,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, जबकि मध्य प्रदेश के चना के दाम 50 रुपये बढ़कर 6,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। चना की दैनिक आवक 6 से 7 मोटरों की हुई।

राजस्थान लाइन की मोठ के दाम दिल्ली में 25 रुपये तेज होकर 6,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 250 रुपये तेज हुई हैं, चेन्नई में शुक्रवार को लेमन अरहर के दाम तेज हुए थे। हालांकि व्यापारी इसके भाव में अभी एकतरफा तेजी के पक्ष में नहीं है, क्योंकि बढ़ी हुई कीमतों में दाल मिलों की मांग का समर्थन नहीं मिल पा रहा। वैसे भी केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार बढ़े दाम पर दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही अरहर की खरीद कर रही है। देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी, साथ ही लेमन अरहर के आयात में भी आगामी दिनों में बढ़ोतरी होगी। नई फसल को देखते हुए मिलर्स भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। सोलापुर मंडी में नई देसी अरहर के भाव 9,500 से 10,550 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में गुरुवार को तेज हुई थी, जबकि आज इसके दाम स्थिर हो गए। उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, साथ ही कृष्णा जिले में नई उड़द की आवकों में बढ़ोतरी हुई है। उधर उड़ीसा में भी नई उड़द की आवक हो रही है। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बढ़ेगी। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में उड़द के कुल उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसकी कीमतों में अब सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,090 डॉलर और एफएक्यू के दाम 1,020 डॉलर प्रति टन बोले गए।

मूंग के भाव दिल्ली में आज भी स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार मूंग की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। जहां खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में खपत राज्यों की मांग अभी बनी रहेगी, तथा खरीफ में मूंग का उत्पादन अनुमान कम हुआ। चालू रबी में बुआई में कमी हुई। वैसे भी उत्पादक राज्यों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में कमी हुई है। हालांकि नेफेड लगातार मूंग बेच रही है। इसलिए मूंग की कीमतों में एकतरफा बढ़ी तेजी, मंदी के आसार नहीं हैं। दिल्ली में राजस्थान लाईन की मूंग के भाव 8,900 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में 100 रुपये तेज हुए हैं। हालांकि पिछले दो दिनों से आयातित मसूर की कीमतों में मंदा आया था। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश की मंडियों में नई मसूर की आवक शुरू हो गई है, लेकिन मौसम खराब है जिस कारण आवक प्रभावित होने का डर है। हालांकि मौसम साफ रहा तो होली के बाद मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में नई मसूर की आवकों में बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,025 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के दाम नरम हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की खरीद कमजोर है, साथ ही मिलर्स भी दाम घटाकर बिकवाली नहीं कर रहे। इसलिए चावल और धान की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है। सिरसा मंडी में डीपी 1,401 किस्म के धान के दाम 3,800 से 4,013 रुपये तथा पीबी 1 किस्म के धान के भाव 3,731 तथा टोहाना मंडी में 1,401 किस्म के धान के दाम 3,950 रुपये और 1,886 किस्म के धान के दाम 3,800 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2,550 से 2,625 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। गुजरात के बाद मध्य प्रदेश की कुछ मंडियों में नये गेहूं की आवक शुरू हो गई है, लेकिन उत्तर भारत के राज्यों में नया गेहूं आने में अभी समय है। इसलिए इसके भाव में हल्का सुधार आ सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार पुरानी मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हो गई है, जबकि रबी मक्का की आवक बिहार की मंडियों में चालू महीने के मध्य बाद शुरू होगी। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। सांगली में स्टार्च क्वालिटी की मक्का के भाव 2375 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बाजरा की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। उत्पादक मंडियों में बाजरे की आवक काफी कम हो रही है, इसलिए आगे इसके भाव में सुधार आने का अनुमान है। पंजाब में पोल्ट्री फीड बाजरा का व्यापार 2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार जौ में माल्ट कंपनियों की मांग अभी बनी रहेगी, जिस कारण इसके भाव में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। जौ का बकाया स्टॉक कम है, जबकि नई फसल मार्च, अप्रैल में आयेगी।

चीनी के दाम स्थिर बने हुए है। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, वैसे भी आगे खपत का सीजन शुरू होगा, इसलिए चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 254.70 लाख टन का हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 259.05 लाख की तुलना में कम है।

सरसों के भाव मजबूत हुए हैं। हालांकि व्यापारी ज्यादा तेजी में नहीं है। मौसम साफ होने के बाद घरेलू मंडियों में नई सरसों की आवक बढ़ेगी, तथा चालू सीजन में उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। ऐसे में कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। सरसों तेल और खल के दाम स्थिर हो गए।

घरेलू बाजार में सोया और पाम तेल की कीमतें पांच रुपये तेज हुई है, जबकि अन्य खाद्वय तेलों के दाम स्थिर हैं। चालू सप्ताह के अंत में मलेशिया में पाम तेल की कीमतों में नरमी आई थी। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में अभी खाद्वय तेलों की कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है, इसलिए घरेलू बाजार में भी इनकी कीमतों में हल्का सुधार बनने की उम्मीद है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। इसलिए व्यापारी घरेलू बाजार में इसके भाव में अभी ज्यादा तेजी में नहीं है। उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें कमजोर हुई हैं। विदेशी बाजार में शुक्रवार को कॉटन की कीमतों में मंदा आया था, इसलिए घरेलू बाजार में भी मिलों की खरीद कम हुई है। हालांकि कॉटन के निर्यात पड़ते बराबर लग रहे, इसलिए स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने से घरेलू बाजार में इसके भाव में आगे फिर सुधार आने की उम्मीद है। वैसे भी आगामी दिनों में कॉटन की दैनिक आवकों में कमी आयेगी।

बिनौला और कपास खली के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्का सुधार आने के आसार हैं।

ग्वार सीड और ग्वार गम के भाव कमजोर हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों की सक्रियता से इसकी कीमतों में चालू सप्ताह के आरंभ में तेजी आई थी, लेकिन बड़े दाम पर प्लाटों की मांग स्थिर नहीं रह पाई। वैसे भी प्लांटों के पास ग्वार सीड का बकाया स्टॉक ज्यादा है। ग्वार गम उत्पादों की निर्यात अप्रैल से दिसंबर के दौरान पिछले साल की तुलना में कम हुआ है। इसलिए इसके भाव में एकतरफा तेजी की उम्मीद अभी नहीं है।

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