पिछले सप्ताह अहमदाबाद में सॉल्वेंट एसोसिएशन का दो दिन का ग्लोबल सेमिनार हुआ। देश विदेश से 500 से ज्यादा डेलीगेट इसमें आए थे। सेमिनार बेहद सफल रहा।
सेमिनार के मुख्य अथिति श्री बलवान भाई राजपूत थे। विशिष्ट अथिति CACP के चेयरमैन श्री विजय पाल और महाराष्ट्र CACP के चेयरमैन श्री पाशा पटेल थे।
Agri Watch ने भारत की फसल 20.54 लाख टन बताई जो पिछले साल 18.81 लाख टन थी।
गुजरात के 15.98 लाख टन, पिछले साल 15.69 लाख टन थी
राजस्थान 3.66 लाख टन, पिछले साल 2.96 लाख टन थी
आंध्र तेलंगाना में इस साल 83000 टन, पिछले साल 57000 टन का अनुमान हैं।
अदानी के श्री शैलेश बल्देवा ने कहा की पिछले दो साल के एनर्जी मेटल ग्रेंस ऑयलसीड में काफी ज्यादा volatility रही है, कैस्टर ऑयल बचा रहा, फंड्स दूसरी जगह लगे रहे।
कैस्टर ऑयल ने साल 2023 की शुरआत 1800 डॉलर से की थी, लास्ट में 1400 डॉलर हुआ। इतने पर भी बिजाई के कमी नहीं आई, मौसम की मदद रही।
सेमिनार में मॉडल फार्म पर खास बात हुई। किसान 7000 किलो तक की यील्ड ले रहे है। जो किसान एडवांस फार्मिंग तकनीक यूज कर रहे है, उनके रिजलट दूसरों के लिए मिसाल है।
सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट के लिए अदानी को पहला, ईदेशु को दूसरा अवार्ड मिला।
जयंत के श्री वरुण उदेशी ने पिछले साल का बाकी 2 लाख तो स्टॉक बताया।
गोकुल के श्री धर्मेन्द्र राजपूत ने कहा की Geo Political factors से कैस्टर ऑयल की डिमांड घटी है।
बिरेन वकील ने कहा की शेयर मार्केट के boom से मनी फ्लो पर असर हुआ है। इस कारन कॉमोडिटीज में इन्वेस्टर्स घटे है। इस साल की दूसरी छमाही में अमेरिका के ब्याज दरें घटने की उम्मीद है। ऐसा होता है तो ट्रेड को फायदा होगा।
पालनपुर के श्री मनोज अग्रवाल ने कहा की कैस्टर मार्केट बॉटम के करीब है। जो भी आवक है, वह मिल्स खरीद रही है। वैसे कोई भी कैस्टर को छोड़ नहीं रहा। सरकार कैस्टर की बिजाई ज्यादा बता रही है मगर बीज कॉम्पनीज सीड की बिक्री कम बता रही हैं। किसान बड़ी फसल देखकर माल नहीं रोक रहे। फरवरी के आवक पिछले साल से ज्यादा है।
पिछले साल लोक डाउन की वजह से चीन की जनवरी फरवरी के खरीद कम थी, अब इकोनॉमी ओपन है तो डिमांड बढ़ रही है। चीन शायद इस साल 10 फीसदी खरीद ज्यादा करे।
ब्राजील में इस साल फसल बहुत बड़ी है मगर उसकी अपनी डिमांड भी बढ़ी है, इस कारण ब्राजील से एक्सपोर्ट की उम्मीद नहीं है।
कैस्टर ऑयल का बुरा वक्त खत्म हो गया है।
यूरोप रिसेशन में है, इस कारण खरीद घट सकती है।
भारत के किसान सप्लाई रोकने की बजाय बेचना पसंद कर रहे है।
ट्रांसग्राफ के श्री नागराज के अनुसार इस साल भारत में कैस्टर ऑयल उत्पादन 8.52 लाख टन होने के आसार है जो पिछले साल से 44000 टन ज्यादा होगा।
अप्रैल से जून का एक्सपोर्ट पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है।
सीजन अंत में कैस्टर स्टॉक पिछले साल के 3.40 लाख टन से 30000 टन कम रहेगा।
भारत को वर्ल्ड की तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनने के अभी 8 से 9 साल लगेंगे
दूसरे देशों में पेट्रो उत्पादन बढ़ रहा है, इस कारण opec का मार्केट शेयर घट रहा है।
कैस्टर ट्रेड के कैप्टेन मानते है की मिलिंग ओवर कैपेसिटी हुई है।