मई में मौसम बेहद गर्म होता है तो तेलों की demand कम होती है। इतने पर भी मई में इम्पोर्टड ऑयल्स,पोर्टस स्टॉक और ट्रेड का स्टॉक 4 महीने की हाई 37.45 लाख टन हुआ है।
मई में इम्पोर्ट अप्रैल से दो लाख टन बढ़ रहा है तो भी पोर्टस का स्टॉक घटने से इम्पोर्ट बढ़ने का असर साइड में चला गया हैं ।
कांड़ला मूंदरा में एडिबल ऑयल्स का स्टॉक बढ़ रहा है। 6 सप्ताह पहले के 71500 टन से अब स्टॉक दोगुना है।
सोय्या पाम का स्टॉक अब एक बराबर 70000 टन है।
भारत मे सीपीओ इम्पोर्ट रिफाइनर्स की जरूरत से कम हो रहा है। अप्रैल के इम्पोर्ट दिसंबर के 6.20 लाख टन से 84000 टन कम है तो भी पोर्टस का स्टॉक दिसंबर के 3.65 लाख टन से 1.60 लाख टन कम है।
अप्रैल में सोय्या तेल इम्पोर्ट दिसंबर के1.52 लाख टन से 2.30 लाख टन बढा है तो भी पोर्टस स्टॉक दिसंबर से 73000 टन कम है।
साफ संकेत है की पोर्टस से रिफायनरीज को डिस्पैच फास्ट हो रही है।
भारत मे सन आयल इम्पोर्ट demand से ज्यादा हो रहा है।
अप्रैल का इम्पोर्ट दिसंबर के 2.60 लाख टन से 10 फीसदी कम है तो भी पोर्टस का अप्रैल में स्टॉक दिसंबर के 1.74 लाख टन से 30 फीसदी बढा है।
सीपीओ की रिफाइनिंग कम होने से ओलिन इम्पोर्ट भी लोकल खपत से कम साबित हो रहा है।
अप्रैल के इम्पोर्ट दिसंबर के 2.51 लाख टन से आधा होने पर भी पोर्ट स्टॉक दिसंबर के 1.34 लाख टन से 55000 टन घटा है।
पिछले दो महीनों में पोर्टस के सोय्या आयल स्टॉक में बड़ी रिकवरी हुई है।
मॉर्च के मध्य में टैंक्स खाली थे, 15 मई को स्टॉक 1.31 लाख टन हुआ है।
सन आयल पाम सोय्या से सस्ता है, इस कारण डिमांड तेज़ रफ़्तार से बढ़ी है। 2023 में साल की एवरेज इम्पोर्ट 2.50 लाख टन थी। 15 मई के पोर्टस स्टॉक 24 दिन की लोकल खपत के लिए काफी है।
पिछले 5 महीनो से पोर्ट स्टॉक बढ़ रहा है।