एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 13 मई 2024

चना, अरहर तेज, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम रुके, ग्वार गम एवं सीड की कीमतें बढ़ी
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें 100-125 रुपये तेज खुली है, लेकिन इन भाव में व्यापार नहीं हुआ। व्यापारियों के अनुसार व्यापार होने पर ही सही भाव का पता चलेगा। केंद्र द्वारा चना की खरीद के लिए एमएसपी तय कर देने से स्टॉकिस्टों की सक्रियता बढ़ गई हैं, हालांकि बढ़ी हुई कीमतों में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रही है। वैसे उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की दैनिक आवक उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही, क्योंकि चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है इसलिए भविष्य तेजी का ही है, बाजार एकतरफा तेज नहीं होगा। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 125 रुपये बढ़कर 6,700 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 100 रुपये तेज होकर 6,625 से 6,650 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 4 से 5 मोटरों की हुई।

सोलापुर में अरहर के दाम तीसरे कार्यदिवस में 50 रुपये तेज खुले हैं। उधर चेन्नई में लेमन अरहर के दाम डॉलर में बीते सप्ताह के अंत में दाम पांच डॉलर नरम हुए थे। व्यापारियों के अनुसार अरहर के आयात पड़ते महंगे हैं इसलिए आयातक दाम तेज करना चाहते है, लेकिन बड़ी तेजी टिक नहीं पा रही है। म्यांमार से लेमन का आयात बराबर हो रहा है, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट भी आ रही। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। इसलिए बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। हालांकि घरेलू बाजार में दलहन की ऊंची कीमतों को लेकर केंद्र सरकार सजग है तथा हर सप्ताह कीमतों की समीक्षा कर रही है। ऐसे में दाल मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। सोलापुर में अरहर के दाम 10,700 से 12,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने हुए हैं।

आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में शनिवार को कमजोर हुई थी, लेकिन आज स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक चालू महीने में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, तथा म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 1,060 डॉलर और एसक्यू के 1,150 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर रहे।

नई मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में बीते सप्ताह कमजोर हुए थे, जबकि आज स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार मूंग दाल में ग्राहकी कमजोर है इसलिए इसकी मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट आने का अनुमान है। मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। मध्य प्रदेश की मडियों में समर मूंग की आवक बढ़ने लगी है तथा इसके भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार बीते सप्ताह इसके दाम तेज हुए थे, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों में मसूर दाल में ग्राहकी कमजोर है। साथ ही तरफ मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की आवक बराबर बनी हुई है। वैसे भी चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। केंद्रीय पूल में मसूर का पुराना स्टॉक भी अच्छा है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग मई अंत के बाद कम हो जायेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,400 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई है। जानकारों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग तो सामान्य की तुलना में कमजोर है, लेकिन बिकवाली भी कम आ रही है। इसलिए व्यापारी अभी ज्यादा मंदे के आसार नहीं है। गेहूं की सरकारी खरीद के कारण धान की आवक मंडियों में बंद है। टोहाना में पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम 4250 से 4300 रुपये और 1718 किस्म के 4,100 रुपये तथा 1,401 किस्म के 3,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2,435 से 2470 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। उत्तर भारत के राज्यों में गेहूं की आवक पहले की तुलना में कम होने लगी है, क्योंकि स्टॉकिस्ट एवं मिलर्स के साथ ही सरकार खरीद हो रही है, हालांकि प्राइवेट खरीद में पहले की तुलना में कमी आई है। ऐसे में इसके भाव में हल्की नरमी और भी बन सकती है। गेहूं की दैनिक आवक 5,000 बोरियों की हुई।

चालू रबी विपणन सीजन 2024-25 में प्रमुख उत्पादक राज्यों से 249.09 लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर हो चुकी है। उत्पादक मंडियों में गेहूं की दैनिक आवक पहले की तुलना में कम हुई है।

मक्का के भाव तेज हुए हैं, व्यापारियों के अनुसार रबी मक्का की आवक मंडियों में लगातार बनी हुई है, इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। सांगली मंडी में मक्का के बिल्टी भाव 2,425 से 2,490 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

बाजरा की कीमतों में बीते सप्ताह सुधार आया था। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। पंजाब पहुंच बाजरा का व्यापार 2,325 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव में सुधार आया है। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार और भी बन सकता है। चरखी दादरी मंडी जौ के भाव 1750 से 1990 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। जौ की कीमतों में आगे और भी तेजी बन सकती है।

चीनी की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। देशभर के राज्यों में अप्रैल अंत तक 315.90 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है तथा कुल उत्पादन 320 लाख टन होने का अनुमान है।

सरसों के भाव में सुधार आ सकता है, मलेशिया में पाम तेल में तेज आई है, साथ ही शिकागो में सोया तेल के दाम तेज खुले हैं। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में सरसों की दैनिक आवकों में आगे कमी आयेगी। ऐसे में सरसों की कीमतों में हल्का सुधार बन सकता है। सरसों तेल के भाव 15 रुपये तेज खुले हैं, साथ ही खल में मांग भी अच्छी है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव पांच से 15 रुपये तेज हो गए। मलेशिया में जुलाई के पाम तेल वायदा अनुबंध के दाम कमजोर 65 रिगिंट तेज होकर भाव 3,874 रिगिंट प्रति टन हो गए, साथ ही शिकागो में सोया तेल के दाम भी तेज हुए हैं। ऐसे में खाद्वय तेलों भाव में इनके भाव में और भी सुधार बन सकता है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। ऐसे में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। शिकागो में सोयाबीन और मील में मंदा आया है, जबकि सोया तेल के दाम तेज खुले हैं।

गुजरात में कैस्टर सीड की आवक 1,70,000 बोरियों की हुई, तथा भाव 15 रुपये तेज होकर 1,080 से 1,115 रुपये प्रति 20 किलो हो गए।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें स्थिर हो गई। उधर विदेशी बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन कॉटन के भाव में मंदा आया था, लेकिन आज इलेक्ट्रानिक ट्रेडिंग में भाव बढ़कर खुले हैं। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, अत: मिलों को कॉटन की खरीद करनी होगी। लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव में सुधार आया है, व्यापारियों के अनुसार नीचे दाम पर मांग निकलने से भाव में सुधार आया है, वैसे भी उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए कीमतों में हल्की तेजी आ सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों में तेजी आई है। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। ऐसे में ग्वार गम और सीड में एकतरफा बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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