साउथ अफ्रीका में सोयाबीन उत्पादन तेज़ रफ़्तार से बढ़ रहा है, इस कारण प्रोसेसिंग कैपेसिटी भी तेज रफ्तार से बढ़ रही है। कई नए प्लांट लगे है।
कुछ साल पहले साउथ अफ्रीका अर्जेटिना से 25 लाख टन मील इम्पोर्ट करता था, अब साउथ अफ्रीका मेजर एक्सपोर्टर है।
साउथ अमेरिका के प्लांट्स मॉडर्न तकनीक के है, इस कारण क्वालिटी में अर्जेटिना को टक्कर दे रहे है।
10 साल में सोयाबीन उतपादन 10 गुना होकर 28 लाख टन हो गया है।
नाइजीरिया और बेनिन में उतपादन दो गुना हो गया है।
वेस्ट अफ्रीका भी सोयाबीन में बड़ा ओरिजिन बन गया है
Non GM सोयाबीन एक्सपोर्ट में अफ्रीका रीजन की तूती है।
1980 में छोटी सी ही फ़सल थी, अब 25 लाख टन है।
टोगो की 10 साल में 10 गुना हुई है।
Non GM फ़सल की वजह से अफ्रीका की मील अब अमेरिका कनाडा पाकिस्तान में बड़ी एंट्री कर चुकी है।
साउथ अफ्रीका अब आबादी और अग्रि क्रॉप्स के उत्पादन में बड़े नाम है। आबादी भी बढ़ी है, पब्लिक की इनकम भी बढ़ी है तो भी साउथ ईस्ट एशिया के पाम देश अफ्रिका को बल्क में पाम आयल शिप नहीं करते।