एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 30 अप्रैल 2024

अरहर कमजोर, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं में हल्का सुधार, ग्वार गम एवं सीड के दाम बढ़े
नई दिल्ली। चना की कीमतें दिल्ली में स्थिर हो गई, हालांकि इन भाव में मिलों की खरीद कमजोर है। व्यापारियों के अनुसार चना की मौजूदा कीमतों में हल्की नरमी और आ सकती है क्योंकि बढ़ी हुई कीमतों में खरीद का समर्थन नहीं मिल पा रहा। हालांकि उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की दैनिक आवक उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही, क्योंकि चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है इसलिए भविष्य तेजी का ही है। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 6,475 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 6,425 से 6,450 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 3 से 4 मोटरों की हुई।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 50 रुपये कमजोर हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार चेन्नई में आयातित लेमन के दाम डॉलर में सोमवार को नरम हुए थे, जबकि आज दाम रुके गए हैं। घरेलू बाजार में दलहन की ऊंची कीमतों को लेकर केंद्र सरकार सख्त है। ऐसे में दाल मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। हालांकि अरहर के आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं इसलिए आयातक दाम तेज करना चाहते है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हुई है। इसलिए बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 10,000 से 11,850 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में दूसरे दिन कमजोर हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए उड़द की कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक अभी बनी हुई हैं साथ ही केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, तथा म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,135 डॉलर और एफएक्यू के 1,050 डॉलर प्रति टन रह गए।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में सोमवार को कमजोर हुए थे जबकि आज दाम स्थिर हैं। व्यापारी मूंग की कीमतों में नरमी आने का अनुमान है, क्योंकि मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम साफ रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। दाहोद मंडी में मूंग के दाम 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मसूर की आवक बराबर बनी हुई है तथा चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी ही आने का अनुमान है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग मई अंत के बाद कम हो जायेगी। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,350 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतों में हल्का सुधार आया। जानकारों के अनुसार मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार और आयेगा, क्योंकि बासमती चावल में निर्यातकों की मांग बनी रहने की उम्मीद है तथा स्टॉकिस्टों को इन भाव में पड़ते नहीं लग रहे। गेहूं की सरकारी खरीद के कारण धान की आवक मंडियों में बंद है। राजस्थान लाईन से 1,718 सेला का व्यापार 7100 से 7,125 रुपये और सुगंधा सेला का 5,050 रुपये तथा 1,509 किस्म के सेला चावल का 6,400 से 6,425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। सूत्रों के अनुसार आगामी दिनों में ईरान की आयात मांग बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही निर्यातकों का बकाया भुगतान भी जल्द ही शुरू होगा।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 5 रुपये तेज होकर 2445 से 2,475 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उत्तर भारत के राज्यों में मौसम साफ है इसलिए नए गेहूं की आवक बढ़ेगी, जिस कारण इसके भाव में हल्की गिरावट आ सकती है। उधर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी नए गेहूं की आवक बराबर बनी हुई है।

मक्का के भाव स्थिर हो गए व्यापारियों के अनुसार रबी मक्का की आवक मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने का अनुमान है। सांगली मंडी में मक्का के बिल्टी भाव का व्यापार 2,400 से 2,475 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

बाजरा की कीमतों में हल्का सुधार आया है। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। चरखी दादरी मंडी में बाजरा का व्यापार 2,240 से 2,260 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। चरखी दादरी मंडी में जौ के भाव 1910 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

चीनी की कीमतें रुकी हुई हैं। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है तथा देशभर के राज्यों में 15 अप्रैल तक 310.93 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।

सरसों के भाव में नरमी आने का अनुमान है उधर मलेशिया में पाम तेल में मंदा आया है, साथ ही शिकागो में सोया तेल के दाम भी कमजोर खुले हैं। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो सरसों की आवक बराबर बनी रहेगी। ऐसे में सरसों की कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। सरसों तेल के साथ ही खल के दाम स्थिर हो गए।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव में पांच से 15 रुपये की गिरावट आई है। मलेशिया में जुलाई महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम 81 रिगिंट कमजोर होकर 3,834 रिगिंट प्रति टन रह गए। साथ ही शिकागो में भी सोया तेल में मंदा आया है। इसलिए इनके भाव में हल्की नरमी और बन सकती है। जानकारों का मानना है कि विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में कमजोर हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन और सोया तेल और मील की कीमतों में मंदा आया है।

गुजरात की मंडियों में कैस्टर सीड की आवक 1,80,000 बोरियों की हुई तथा इसके भाव 5 रुपये बढ़कर 1,080 से 1,115 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। राजकोट में कमर्शियल तेल के दाम 1,140 रुपये तथा एफएसजी के दाम 1,150 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें स्थिर हो गई। उधर आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में आज कॉटन की कीमतें कमजोर खुली हैं जिस कारण घरेलू मिलों की मांग कमजोर हो गई। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, अत: मिलों को कॉटन की खरीद करनी होगी। लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव नरम बने हुए हैं, व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है साथ ही उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम में हल्का सुधार आया है, लेकिन व्यापारी बड़ी तेजी में नहीं है। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। ऐसे में ग्वार गम और सीड में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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