चना कमजोर, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के दाम स्थिर, ग्वार गम एवं सीड के भाव रुके
नई दिल्ली। चना की कीमतें दिल्ली में 25 रुपये कमजोर खुली हैं। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से दाम कमजोर हुए हैं, वैसे भी पिछले चार दिनों में इसकी कीमतों में 350 से 400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई थी। अत: मौजूदा कीमतों में हल्की नरमी और आ सकती है। हालांकि उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की दैनिक आवक उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही, क्योंकि चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है इसलिए भविष्य तेजी का ही है। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 6,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 25 रुपये घटकर 6,450 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 3 से 4 मोटरों की हुई।
सोलापुर में अरहर की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार चेन्नई में आयातित लेमन के दाम आज भी रुके हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार अरहर के आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं इसलिए आयातक दाम तेज करना चाहते है लेकिन घरेलू बाजार में दलहन की ऊंची कीमतों को लेकर केंद्र सरकार सख्त है। ऐसे में दाल मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हुई है। इसलिए बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 10,000 से 11,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
आयातित उड़द की कीमतें डॉलर में चेन्नई में आज स्थिर हो गई, जबकि शुक्रवार को दाम कमजोर होकर बंद हुए थे। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए इसकी कीमतों में एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक अभी बनी हुई हैं साथ ही केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, तथा म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,160 डॉलर और एफएक्यू के 1,070 डॉलर प्रति टन पर स्थिर हो गए।
मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर ही बने हुए हैं। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में समर मूंग की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम साफ रहा तो उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ेगी। चालू सीजन में समर में मूंग की बुआई बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।
देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। हालांकि पिछले दो दिनों से इसकी कीमतें तेज हुई थी। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में नई मसूर की आवक बराबर बनी हुई है तथा चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी ही आने का अनुमान है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग मई अंत के बाद कम हो जायेगी। केंद्रीय पूल में मसूर का स्टॉक 6 से 6.50 लाख क्विंटल का है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,350 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग बनी रहने की उम्मीद है इसलिए मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार आ सकता है। गेहूं की सरकारी खरीद के कारण धान की आवक मंडियों में बंद है। राजस्थान लाईन से 1,718 सेला का व्यापार 7150 से 7200 रुपये और 1,509 सेला का व्यापार 6,500 रुपये तथा सुगंधा सेला का 5,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2460 से 2,470 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। उत्तर भारत के राज्यों में मौसम खराब है इसलिए नए गेहूं की आवक प्रभावित होने का डर है। इसलिए इसके भाव में हल्का सुधार बन सकता है। उधर मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी नए गेहूं की आवक बराबर बनी हुई है।
मक्का के भाव कमजोर हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार रबी मक्का की आवक मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने का अनुमान है। बिहार की नौगछिया में मक्का का व्यापार 2,020 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार बाजरा की आवक मंडियों में काफी कम हो रही है इसलिए ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। चरखी दादरी मंडी में बाजरा का व्यापार 2,200 से 2,220 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
जौ के भाव स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ने से जौ की आवकों में कमी आई है। उधर स्टॉकिस्ट एवं माल्ट कंपनियां खरीद कर रही हैं। इसलिए भाव में हल्का सुधार बन सकता है। चरखी दादरी मंडी में जौ के भाव 1860 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
चीनी की कीमतें रुकी हुई हैं। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है तथा देशभर के राज्यों में 15 अप्रैल तक 310.93 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।
सरसों के भाव स्थिर है। मलेशिया में चालू सप्ताह के अंत में पाम तेल में सुधार आया है, साथ ही शिकागो में सोया तेल के दाम भी तेज हुए थे। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो सरसों की आवक बराबर बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। सरसों तेल के साथ ही खल के दाम स्थिर हो गए।
घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के भाव 5 से 10 रुपये कमजोर खुले हैं, लेकिन पाम तेल 4 रुपये तेज हैं। उधर मलेशिया में पाम तेल के दाम सप्ताहांत में तेज हुए। साथ ही शिकागो में भी सोया तेल में सुधार आया है। हालांकि जानकारों का मानना है कि विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। अत: घरेलू बाजार में इनकी कीमतों एकतरफा दाम नहीं बढ़ेंगे।
सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।
गुजरात की मंडियों में कैस्टर सीड की आवक 1,65,000 बोरियों की हुई तथा इसके भाव 10 रुपये घटकर 1,090 से 1,120 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। राजकोट में कमर्शियल तेल के दाम 5 रुपये कमजोर होकर 1,150 रुपये तथा एफएसजी के दाम 5 रुपये घटकर 1,160 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें दूसरे दिन भी स्थिर बनी हुई है। विश्व बाजार में आज कॉटन की कीमतों में मिलाजुला रुख है, जिस कारण घरेलू मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, अत: मिलों को कॉटन की खरीद करनी होगी। हालांकि इसकी कीमतों में तेजी, मंदी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर ही निर्भर करेगी।
बिनौला एवं कपास खली के भाव स्थिर हो गए, व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है साथ ही उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आने से तेल मिलों की बिक्री भी कमजोर है। इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।
ग्वार सीड और ग्वार गम के दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। ऐसे में ग्वार गम और सीड में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।