एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 18 अप्रैल 2024

अरहर तेज, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं में नरमी, ग्वार गम एवं सीड के दाम तेज
नई दिल्ली। चना की कीमतें दिल्ली में स्थिर बनी हुई, हालांकि इन भाव में मिलों की खरीद कमजोर है। व्यापारियों के अनुसार चना के भाव में अभी तेजी, मंदी बनी रहेगी, क्योंकि चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है, तथा केंद्रीय पूल में बफर स्टॉक के लिए सरकार बाजार भाव पर चना खरीदेगी। हालांकि उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो चना की आवक बढ़ेगी तथा दाल मिलें केवल जरूरत के हिसाब से ही चना की खरीद कर रहे हैं। ऐसे में भाव नीचे आने पर ही चना की खरीद करें। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 6,325 से 6,350 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 8 से 10 मोटरों की हुई।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 150 रुपये तेज हो गई। व्यापारियों के अनुसार अरहर के आयात पड़ते महंगे हैं, इसलिए आयातक दाम तेज कर रहे हैं, लेकिन बढ़े भाव में दाल मिलों की खरीद का समर्थन नहीं मिल पा रहा। इसलिए बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। वैसे भी दलहन की कीमतों में तेजी को लेकर केंद्र सरकार सख्त है। ऐसे में दाल मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हुई है। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 10,000 से 11,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतों में बुधवार को तेजी आई थी, जबकि देसी के दाम स्थिर ही बने रहे। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है इसलिए एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक अभी बनी हुई हैं साथ ही केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, तथा म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर ही बने हुए हैं। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मौसम साफ है इसलिए उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। छिंदवाड़ा में नई मूंग के दाम 6,800 से 8,050 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो नई मसूर की आवकों में और बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। केंद्र सरकार दलहन की कीमतों की हर सप्ताह समीक्षा भी कर रही है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी ही आने का अनुमान है। जानकारों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें कमजोर हुई हैं। व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग कमजोर है हालांकि दाम पहले ही काफी नीचे आ चुके हैं इसलिए भाव रुकने की उम्मीद है। मंडियों में धान की आवक लगभग बंद है।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2410 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। उत्तर भारत के राज्यों में मौसम साफ हुआ है इसलिए नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी होगी। इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी हुई है।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार रबी मक्का की आवक मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए इसके भाव में आगे और नरमी आने का अनुमान है। नागपुर में फीड क्वालिटी की मक्का के भाव 2,310 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। हालांकि व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, वैसे भी मंडियों में आवक काफी कम हो रही है। पंजाब पहुंच बाजरा का व्यापार 2,330 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव कमजोर हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवक अभी बराबर बनी हुई है साथ ही स्टॉकिस्टों की खरीद भी बनी हुई है। सिरसा मंडी में जौ के भाव 50 रुपये घटकर 1700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चीनी के दाम स्थिर हो गए। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

कैस्टर सीड के दाम गुजरात में स्थिर हो गए। कैस्टर सीड के भाव 1,090 से 1,110 रुपये प्रति 20 किलो पर स्थिर हो गए, तथा दैनिक आवक 1,50,000 बोरियों की हुई। कैस्टर सीड के भाव राजकोट में कमर्शियल के 1,155 रुपये और एफएसजी के 1,165 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

सरसों के भावों में हल्का सुधार आ सकता है। मलेशिया में जुलाई महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल में हल्का सुधार आया है, साथ ही शिकागो में सोया तेल में तेजी आई है। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नई सरसों की आवक अभी बराबर बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में अभी अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। सरसों तेल के दाम पांच रुपये कमजोर हुए, जबकि खल में भी ग्राहकी कमजोर है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों में 5 से 20 रुपये की कमजोरी आई है। हालांकि मलेशिया में जुलाई महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम 9 रिगिंट तेज होकर 4,021 रिगिंट प्रति टन हो गए, साथ ही शिकागो में सोया तेल में तेजी आई है। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। अत: घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में कमजोर हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन और मील के दाम कमजोर हुए हैं, जबकि सोया तेल में तेजी दर्ज की गई।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में नरमी आई है। विश्व बाजार में पिछले दो दिनों में इसकी कीमतों में 6 सेंट की गिरावट आई। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में एमएनसी कंपनियां कॉटन की बिकवाली कर रही है, तथा हाल ही में विश्व बाजार में दाम कमजोर होने से निर्यात पड़ते भी नहीं लग रहे। ऐसे में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी विदेशी बाजार के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव में हल्की नरमी आई है, व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम के दाम तेज हुए हैं। हालांकि व्यापारी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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