एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 15 अप्रैल 2024

चना, मसूर एवं अरहर कमजोर, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव नरम, ग्वार गम एवं सीड में मंदी
नई दिल्ली। बढ़े दाम पर स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से राजस्थानी चना के दाम 25 रुपये कमजोर हुए हैं, जबकि मध्य प्रदेश के स्थिर बने रहे। व्यापारियों के अनुसार पिछले सप्ताह चना की कीमतों में तेजी आई थी, तथा बढ़े दाम पर मिलों की खरीद का समर्थन नहीं मिल पाया। हालांकि स्टॉकिस्टों की सक्रियता अभी भी बनी हुई है, इसलिए इसके भाव में तेजी, मंदी बनी रहेगी। वैसे भी चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है, तथा केंद्रीय पूल में बफर स्टॉक के लिए सरकार को चना की खरीद करेगी। हालांकि उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो चना की आवक बढ़ेगी तथा दाल मिलें केवल जरूरत के हिसाब से ही चना की खरीद कर रहे हैं। ऐसे में भाव नीचे आने पर ही चना की खरीद करें। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 6,325 से 6,350 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 5 से 6 मोटरों की हुई।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 100 रुपये कमजोर हो गई। जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार की सख्ती को देखते हुए मिलर्स जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं, इसलिए अरहर के भाव में गिरावट आई है, तथा मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट आने का अनुमान है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हुई है। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 10,000 से 11,600 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है। हालांकि पिछले सप्ताह इसके दाम डॉलर में तेज हुए हैं, जिस घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों में सुधार आया था। हालांकि जिस तरह से तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक बनी हुई हैं साथ ही केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, तथा म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर ही बने हुए हैं। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मौसम साफ है इसलिए उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। छिंदवाड़ा में नई मूंग के दाम 6,800 से 8,050 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में 25 रुपये कमजोर हो गए। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों ने पिछले सप्ताह मसूर की कीमतें तेज की थी। हालांकि मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो नई मसूर की आवकों में और बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,400 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार चावल में निर्यात मांग अभी बनी रहने की उम्मीद है इसलिए इनके भाव में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। अमृतसर मंडी में 1,121 किस्म के धान के भाव 4,400 से 4,525 रुपये और 1,718 किस्म के 4,300 से 4,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे। गेहूं की सरकारी खरीद के कारण हरियाणा की उत्पादक मंडियों में धान की दैनिक आवक बंद हो गई है।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 10 रुपये कमजोर होकर भाव 2440 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। उत्तर भारत के राज्यों में मौसम खराब होने से नए गेहूं की आवकों का दबाव एक, दिन लेट बनेगा। हालांकि मौसम साफ होते ही नई फसल की आवक बढ़ेगी, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में गेहूं की आवक 10,000 बोरी की हुई।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक बिहार की मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए इसके भाव में आगे और नरमी आने का अनुमान है। चालीसगांव मंडी में स्टॉर्च मक्का के भाव 2,235 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। हालांकि व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, वैसे भी मंडियों में आवक काफी कम हो रही है। दादरी मंडी में बाजरा का व्यापार 2,260 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव में हल्का सुधार आया है। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जौ की आवक खराब मौसम से प्रभावित हुई है इसलिए भाव में सुधार आया है। दादरी मंडी में जौ के भाव 1750 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चीनी के दाम स्थिर हो गए। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

कैस्टर सीड के दाम गुजरात में पांच रुपये कमजोर हो गए, मंडियों में कैस्टर सीड के भाव घटकर 1,115 से 1,145 रुपये प्रति 20 किलो रह गए, तथा दैनिक आवक 1,85,000 बोरियों की हुई। उधर राजकोट में कैस्टर तेल कर्मिशय के दाम 5 रुपये कमजोर होकर 1,170 रुपये तथा एफएसजी के 5 रुपये घटकर 1,180 रुपये प्रति 10 किलो रह गए।

सरसों के भाव में नरमी आने का अनुमान है। मलेशिया में जून महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम नरम हुए  है, जबकि शिकागो में सोया तेल में तेजी आई है। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नई सरसों की आवक अभी बराबर बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकता है। सरसों तेल के दाम पांच रुपये तेज खुले हैं, लेकिन खल में ग्राहकी कमजोर है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों में पांच रुपये की तेजी आई है। हालांकि मलेशिया में जून महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम पांच रिगिंट कमजोर होकर 4,277 रिगिंट प्रति टन रह गए, लेकिन शिकागो में सोया तेल में तेजी आई है। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। अत: घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन और मील के दाम कमजोर हुए हैं, जबकि सोया तेल में तेजी दर्ज की गई।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें पांचवे कार्यदिवस में भी कमजोर हो गई। विश्व बाजार में पिछले सप्ताह इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में एमएनसी कंपनियां कॉटन की बिकवाली कम रही है, तथा हाल ही में विश्व बाजार में दाम कमजोर होने से निर्यात पड़ते भी नहीं लग रहे। ऐसे में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी विदेशी बाजार के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव में हल्का सुधार आया है, व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम में गिरावट आई है। व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य होने का अनुमान है, जिससे कीमतों पर दबाव है। हालांकि उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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