ग्राहकी बनी रहने चना एवं देसी मसूर मजबूत, अरहर एवं उड़द में मिलाजुला रुख
नई दिल्ली। दाल मिलों की खरीद बनी रहने से घरेलू बाजार में शनिवार चना के साथ ही देसी मसूर के दाम तेज हुए, जबकि इस दौरान अरहर एवं उड़द तथा मूंग में मिलाजुला रुख रहा।
केंद्र सरकार ने कहां है कि म्यांमार से दालों का आयात करने वाले व्यापारियों के लिए भुगतान तंत्र को सरल बनाया गया है।
उपभोकता मामले मंत्रालय की सचिव, ने 15 अप्रैल, 2024 से ऑनलाइन स्टॉक मॉनिटरिंग के लिए दाल उद्योग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि जो कोई भी दालों के वायदा व्यापार में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ ईसी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा।
बर्मा से चेन्नई पहुंच उड़द के दाम डॉलर में चालू सप्ताह में तेज हुए थे, लेकिन बढ़े दाम पर दाल मिलों की मांग कमजोर होने से आयातित के दाम नरम हुए। हालांकि देसी उड़द में तेजी दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार केंद्र सरकार की सख्ती तो देखते हुए बढ़े दाम पर दाल मिलें जरुरत के हिसाब ही खरीद कर रही हैं। वैसे भी उड़द दाल में दक्षिण भारत की सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक अभी बनी रहने का अनुमान है। उधर म्यांमार में नई उड़द की आवक बढ़ने से आगामी दिनों में आयात बढ़ेगा, तथा बर्मा में उड़द का उत्पादन अनुमान ज्यादा है। इसलिए बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि आयातित उड़द डिस्पैरिटी में बिक रही है, इसलिए आयातक भाव तेज कर रहे हैं।
अरहर की कीमतों में दूसरे दिन भी मिलाजुला रुख देखा गया। जहां आयातित अरहर के दाम कमजोर हुए वहीं देसी के भाव में तेजी दर्ज की गई। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने दलहन के सप्ताहिक स्टॉक की जानकारी मांगी है लेकिन अगर तेजी जारी रही तो फिर सरकार इस पर स्टॉक लिमिट भी लगा सकती है। उधर बढ़ी हुई कीमतों में अरहर दाल में थोक के साथ ही खुदरा में ग्राहकी उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही है, तथा आगामी दिनों में म्यांमार के साथ ही अफ्रीकी देशों से अरहर का आयात बढ़ेगा। इसलिए बढ़े दाम स्टॉक हल्का करना चाहिए। हालांकि घरेलू मंडियों में देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है वैसे भी प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में अरहर के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है तथा अरहर के आयात पड़ते महंगे हैं।
सूत्रों के अनुसार चना की खरीद सरकार एमएसपी से 400 रुपये प्रति क्विंटल उंचे दाम पर करेगी, इसलिए इसकी कीमतों में तेजी बनी हुई है। वैसे भी चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है, इसलिए चना का भविष्य तेजी का ही है। हालांकि अभी एकतरफा बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए क्योंकि उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नए चना की आवक बनी रहेगी। चना के दाम उत्पादक मंडियों में समर्थन मूल्य से ऊपर है, जिस कारण मौजूदा कीमतों में दाल मिलें जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है। ऐसे में चना में समय, समय पर मुनाफावसूली करते रहना चाहिए।
मुंबई में कनाडा की पीली मटर के दाम 4,325 से 4,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर रसिया की पीली मटर के दाम 4,225 से 4,250 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मुंद्रा बंदरगाह पर रसिया की पीली मटर के भाव 4,250 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। कानपुर में देसी मटर के भाव 25 रुपये तेज होकर 4,575 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दिल्ली में देसी मसूर के दाम तेज हुए हैं, जबकि बंदरगाह पर आयातित के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार चालू सप्ताह में मध्य प्रदेश कई जिलों में प्रतिकूल मौसम से मसूर की दैनिक आवक प्रभावित हुई थी, जबकि अभी भी उत्तर भारत में मौसम खराब है। इसलिए स्टॉकिस्ट दाम तेज कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार मौसम अनुकूल रहा तो आगामी दिनों में नई मसूर की आवक बढ़ेगी। वैसे भी चालू रबी में मसूर की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। ऐसे में बड़ी हुई कीमतों में मसूर का स्टॉक हल्का करना चाहिए।
मूंग के भाव जयपुर में तेज हुए जबकि अन्य उत्पादक मंडियों में स्थिर ही बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, वैसे भी रबी सीजन में इसकी बुआई पिछले साल की तुलना में कम हुई थी, जिस कारण उत्पादन अनुमान कम है। हालांकि उत्पादक राज्यों में आगामी दिनों में नई मूंग की दैनिक आवक बढ़ेगी। इसलिए मौजूदा कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है। चालू समर सीजन में मूंग की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है।
मुंबई में उड़द एफएक्यू के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 9,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
जयपुर में उड़द के बिल्टी भाव तेज होकर 8,500 से 9,900 रुपये और जलगांव में इसके दाम बढ़कर 9,500 से 9,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
इंदौर मंडी में बोल्ड उड़द के भाव दाम तेज होकर 8,100 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
देसी अरहर की कीमतें कानपुर में तेज हुई, जबकि इंदौर, दाहोद और छिंदवाड़ा में दाम स्थिर बने रहे।
मुंबई में लेमन अरहर के दाम शाम के सत्र में 100 रुपये घटकर 10,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
दिल्ली में लेमन अरहर के दाम शाम के सत्र में 11,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें कमजोर हो गई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 100 रुपये घटकर 11,450 से 11500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 100 रुपये कमजोर होकर 10,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मतवारा अरहर के भाव 100 रुपये नरम होकर 10,100 से 10,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। सफेद अरहर की कीमतें 100 रुपये कमजोर होकर 10,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।
दिल्ली में देसी मसूर के दाम 50 रुपये तेज होकर भाव 6,400 से 6,425 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6,250 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। मुंद्रा बंदरगाह पर मसूर के भाव 6,100 रुपये और हजीरा बंदरगाह पर 6,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इंदौर में देसी मसूर के बिल्टी दाम बढ़कर 6,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दिल्ली में राजस्थान लाइन के नए चना के दाम 150 रुपये तेज होकर 6,350 से 6,375 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश लाइन के नए चना के भाव 125 रुपये बढ़कर 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
जयपुर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 8,300 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इंदौर में बोल्ड मूंग के दाम 8,200 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। जलगांव मंडी में पुरानी समर मूंग के दाम 8,700 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।