एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 13 अप्रैल 2024

चना एवं मसूर में तेजी, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव स्थिर, ग्वार गम एवं सीड में नरमी

नई दिल्ली। सूत्रों के अनुसार चना की खरीद सरकार एमएसपी से 400 रुपये ज्यादा दाम पर करेगी, इसलिए दिल्ली में चना की कीमतें शनिवार को 100 रुपये तेज खुले हैं। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान कम है, इसलिए स्टॉकिस्ट दाम तेज कर रहे हैं। वैसे भी केंद्रीय पूल में बफर स्टॉक के लिए सरकार को चना की खरीद करनी होगी। हालांकि उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो चना की आवक बढ़ेगी तथा दाल मिलें केवल जरूरत के हिसाब से ही चना की खरीद कर रहे हैं। ऐसे में भाव नीचे आने पर ही चना की खरीद करें। दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 100 रुपये तेज होकर 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 100 रुपये बढ़कर 6,275 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। चना की दैनिक आवक 2 से 3 मोटरों की हुई।

सोलापुर में अरहर की कीमतें स्थिर हो गई। जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार की सख्ती को देखते हुए मिलर्स जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं, इसलिए अरहर के भाव में गिरावट आने का अनुमान है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। अरहर दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हुई है। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 10,500 से 11,700 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि चालू सप्ताह में डॉलर में दाम तेज हुए हैं, जिस घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों में सुधार आया है। हालांकि जिस तरह से तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक बनी हुई हैं साथ ही केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, वैसे भी म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर ही बने हुए हैं। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मौसम साफ है इसलिए उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में 25 रुपये तेज हो गए। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्ट मसूर की कीमतें तेज कर रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो नई मसूर की आवकों में और बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,375 से 6,400 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल में हल्की नरमी आई है। व्यापारियों के अनुसार चावल में निर्यात मांग अभी बनी रहने की उम्मीद है इसलिए इनके भाव में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। अमृतसर मंडी में 1,121 किस्म के धान के भाव 4,511 रुपये और 1,718 किस्म के 4,425 रुपये प्रति क्विंटल रहे। गेहूं की सरकारी खरीद के कारण उत्पादक मंडियों में धान की दैनिक आवक लगभग बंद हो गई है।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रह गए। उत्तर भारत के राज्यों में नए गेहूं की आवक बढ़नी शुरू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो आगामी दिनों में आवकों का दबाव बनेगा, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में गेहूं की आवक 6,500 बोरी की हुई।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक बिहार की मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए इसके भाव में आगे और नरमी आने का अनुमान है। बारामती मंडी में फीड क्वालिटी की मक्का के भाव 2,295 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। हालांकि व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, वैसे भी मंडियों में आवक काफी कम हो रही है। पंजाब पहुंच बाजरा का व्यापार 2,350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थिर हो गए। उत्पादक मंडियों में जौ की नई फसल की आवक बराबर बनी हुई है, तथा आगामी दिनों में आवक और बढ़ेगी, इसलिए मौजूदा भाव में नरमी आने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में जौ के भाव 1550 से 1750 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

चीनी के दाम स्थिर हो गए। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

कैस्टर सीड के दाम गुजरात में स्थिर हो गए, मंडियों में कैस्टर सीड के भाव 1,130 से 1,150 रुपये प्रति 20 किलो बोले गए, तथा दैनिक आवक 1,65,000 बोरियों की हुई। उधर राजकोट में कैस्टर तेल कर्मिशय के दाम 5 रुपये तेज होकर 1,175 रुपये तथा एफएसजी के 5 रुपये बढ़कर 1,185 रुपये प्रति 10 किलो हो गए।

सरसों के भाव में नरमी आने का अनुमान है, चालू सप्ताह के अंत में मलेशिया में पाम तेल के दाम कमजोर हुए थे, साथ ही शिकागो में सोया तेल में नरम आई थी। उधर उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नई सरसों की आवक अभी बराबर बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में नरमी आने का अनुमान है। सरसों तेल के साथ ही खल में भी ग्राहकी कमजोर है।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों में 2 से 5 रुपये का मंदा आया है। मलेशिया में चालू सप्ताह में पाम तेज की कीमतें कमजोर हुई है, साथ ही शिकागो में सोया तेल में नरमी आई। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। अत: घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में नरमी आने का अनुमान है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में दूसरे दिन कमजोर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें चौथे दिन भी कमजोर हो गई, क्योंकि विश्व बाजार में शुक्रवार को भी कॉटन में गिरावट आई थी। जानकारों के अनुसार एमएनसी कंपनियां कॉटन की बिकवाली कम रही है, जबकि हाल ही में विश्व बाजार में दाम कमजोर होने से निर्यात पड़ते भी नहीं लग रहे। ऐसे में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी विदेशी बाजार के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बिनौला एवं कपास खली के भाव स्थिर हो गए, व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, साथ ही उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम में नरमी आई है। व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों की सक्रियता से इसकी कीमतों में तेजी आई थी। हालांकि ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथा प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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