एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 9 अप्रैल 2024

अरहर तेज, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं में नरमी जारी, ग्वार गम एवं सीड स्थिर
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतें स्थिर हो गई। चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है इसलिए स्टॉकिस्ट इसके दाम तेज कर देते हैं, लेकिन बढ़े दाम पर मांग का समर्थन नहीं मिल पा रहा। इसलिए तेजी, मंदी बनी हुई है। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो चना की आवक बढ़ेगी तथा दाल मिलें केवल जरूरत के हिसाब से ही चना की खरीद कर रहे हैं। ऐसे में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।

दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 5,900 से 5,925 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 5,850 से 5,875 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। चना की दैनिक आवक 8 से 10 मोटरों की हुई।

चालू रबी में राजस्थान से एमएसपी पर 5,216 टन तथा गुजरात से 10,016 टन चना की खरीद हुई है, जबकि मध्य प्रदेश से खरीद शुरू नहीं हुई है।

जयपुर मंडी में मोठ के बिल्टी भाव 6,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 50 रुपये तेज खुली हैं। बर्मा से चेन्नई पहुंच लेमन अरहर की कीमतें पिछले सप्ताह तेज हुई थी, जिस कारण इसके आयात पड़ते महंगे हैं। इसलिए आयातक इसके दाम तेज करना चाहते हैं। हालांकि बढ़ी हुई कीमतों में मुनाफावसूली करते रहना चाहिए। आगामी दिनों में म्यांमार से लेमन की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूडान से नई अरहर की शिपमेंट आयेगी। घरेलू बाजार में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रही है क्योंकि अरहर दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। उधर केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 9,500 से 11,650 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बर्मा से आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में स्थिर हो गई, जबकि सोमवार को डॉलर में इसके दाम नरम हुए थे। जानकारों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में उड़द की आवक बनी हुई हैं। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। वैसे भी आगामी दिनों में म्यांमार से उड़द का आयात बढ़ेगा, वैसे भी म्यांमार में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे घरेलू बाजार में स्टॉकिस्टों की सक्रियता से उड़द की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं। बर्मा से चेन्नई के लिए उड़द एसक्यू के दाम 1,170 डॉलर एवं एफएक्यू के 1,080 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए।  

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में अभी भी स्थिर बने रहे। व्यापारी मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। मौसम साफ है इसलिए उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। जयपुर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 8,300 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।  

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो नई मसूर की आवकों में और बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार चावल में निर्यात मांग अभी बनी रहने की उम्मीद है इसलिए इनके भाव में आगे सुधार आने की उम्मीद है। रतिया मंडी में 1,886 किस्म के धान के भाव 4,211 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 15 रुपये कमजोर होकर 2400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मौसम अनुकूल रहा तो उत्तर भारत के राज्यों में नए गेहूं की आवक आगामी दिनों बढ़ेगी, इसलिए आगे इसके भाव में नरमी आने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवकों में बढ़ोतरी हुई है।

मक्का के भाव कमजोर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मक्का की आवक बिहार की मंडियों में लगातार बढ़ी रही है, इसलिए इसके भाव में आगे और नरमी आने का अनुमान है। राजनांदगांव में फीड क्वालिटी की मक्का के भाव 2,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। हालांकि व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, वैसे भी मंडियों में आवक काफी कम रह गई है। पंजाब पहुंच बाजरा का व्यापार 2,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव स्थिर हो गए। उत्पादक मंडियों में जौ की नई फसल की आवक बराबर बनी हुई है, तथा आगामी दिनों में आवक और बढ़ेगी, इसलिए मौजूदा भाव में नरमी आने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में जौ के भाव 1605 से 1,795 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटी अनुसार रहे।

चीनी के दाम स्थिर हो गए। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, गर्मियों का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि चीनी के आरंभिक अनुमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

कैस्टर सीड के दाम गुजरात में लगातार चौथे कार्यदिवस में पांच रुपये कमजोर होकर 1,130 से 1,165 रुपये प्रति 20 किलो रह गए, तथा दैनिक आवक 1,50,000 बोरियों की हुई। उधर राजकोट में कैस्टर तेल कर्मिशय के दाम 3 रुपये तेज होकर 1,183 रुपये तथा एफएसजी के 3 रुपये बढ़कर 1,193 रुपये प्रति 10 किलो हो गए।

सरसों के भाव में सुधार आने की उम्मीद है। मलेशिया में पाम तेल के दाम तेज खुले हैं, साथ ही शिकागो में सोया तेल में तेजी आई है। उधर उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा तो नई सरसों की आवक अभी बराबर बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में हल्का सुधार आने का अनुमान है। सरसों तेल के साथ ही खल के दाम स्थिर बने हुए हैं।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के दाम पांच से दस रुपये नरम खुले हैं, उधर मलेशिया में जून महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल के दाम 16 रिगिंट तेज होकर दाम 4,311 रिगिंट प्रति टन हो गए। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। अत: घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में इसके भाव में हल्का सुधार बन सकता है लेकिन ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है क्योंकि उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन और मील के दाम कमजोर हुए हैं, जबकि सोया तेल में तेजी आई है।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें स्थिर हो गई, क्योंकि आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में इसके भाव में मिलाजुला रुख है। व्यापारियों के अनुसार कॉटन में स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने की उम्मीद है, क्योंकि मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। इसलिए आगे सुधार बनने की उम्मीद है।

बिनौला एवं कपास खली के भाव में हल्का सुधार आया है। व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, साथ ही उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतें लगभग स्थिर हो गई, हालांकि स्टॉकिस्टों की सक्रियता बनी हुई है, इसलिए मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार तो आ सकता है लेकिन बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। वैसे भी ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है तथ प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा है। हालांकि पहले की तुलना में ग्वार सीड की दैनिक आवकों में कमी आई है।

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