एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 16 मार्च 2024

अरहर तेज, चना के साथ ही अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव नरम, ग्वार गम एवं सीड स्थिर
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतों में शुक्रवार को मंदा आया था, जबकि आज दाम स्थिर हो गए व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल रहा नए चना की आवक होली के बाद बढ़ेगी। जिसे देखते हुए मिलर्स जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है, तथा मंडियों में अच्छी क्वालिटी का पुराना चना कम है, लेकिन एक बार नई फसल की आवकों का दबाव बनने पर दाम कम होंगे।

दिल्ली में राजस्थान के चना के भाव 6,025 से 6,050 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, जबकि मध्य प्रदेश के चना के दाम 5,975 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। राजस्थान के नए चना के दाम 5,925 से 5,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 5,875 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चना की दैनिक आवक 7 से 8 मोटरों की हुई।

राजस्थान लाइन की मोठ के दाम दिल्ली में 25 रुपये तेज होकर 6,400 से 6,425 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 50 रुपये तेज हो गई। व्यापारियों के अनुसार अरहर के आयात पड़ते महंगे हैं, इसलिए आयातक दाम तेज करना चाहते हैं इसलिए इसकी कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकती है, लेकिन बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी। घरेलू बाजार में दाल मिलें बढ़े भाव में केवल जरुरत के हिसाब से खरीद कर रही है क्योंकि अरहर दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर ही है। उधर केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी, साथ ही लेमन अरहर के आयात में भी आगामी दिनों में बढ़ोतरी होगी। सोलापुर मंडी में देसी अरहर के भाव 9,500 से 10,550 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में शुक्रवार को तेज होकर बंद हुई थी, जबकि इसके दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में आयातित उड़द की कीमतों में हल्का सुधार बन सकता है लेकिन थोक एवं खुदरा में उड़द दाल में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में नई फसल की आवक आगामी दिनों में और बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बढ़ेगी। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में उड़द के कुल उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसकी कीमतों में अब सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,115 डॉलर और एफएक्यू के दाम 1,040 डॉलर प्रति टन बोले गए।

मूंग के भाव दिल्ली में आज भी स्थिर बने हुए हैं। व्यापारी अभी इसके भाव में बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। व्यापारियों के अनुसार मौसम साफ है इसलिए उत्पादक मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। दिल्ली में राजस्थान लाइन की मूंग के भाव 9,100 से 9,200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए, हालांकि शुक्रवार शाम को इसके दाम कमजोर हुए थे। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम अनुकूल रहा तो होली के बाद नई मसूर की आवकों में बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी आने का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग पहले की तुलना में सुधरी है, जबकि मिलर्स दाम घटाकर बिकवाली नहीं कर रहे। इसलिए चावल और धान की कीमतों में अब ज्यादा मंदे के आसार नहीं है। टोहाना मंडी में 1,401 किस्म के धान का भाव 4,000 से 4,243 रुपये तथा 1,121 किस्म के धान के दाम 4,000 से 4,425 रुपये और सिरसा मंडी में 1,401 किस्म के धान के दाम 4,163 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 15 रुपये कमजोर होकर दाम 2,630 से 2,635 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। व्यापारियों के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों में नया गेहूं आने में अभी समय है। इसलिए इसके भाव में धीरे, धीरे नरमी आने की उम्मीद है। मौसम अनुकूल रहा तो होली के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में नए गेहूं की आवक बढ़ेगी।

मक्का के भाव स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार पुरानी मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हो गई है, जबकि रबी मक्का की आवक बिहार की मंडियों में सप्ताह भर बाद शुरू हो जायेगी। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। मालेगांव में फीड क्वालिटी की मक्का के भाव 2,260 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। उत्पादक मंडियों में बाजरे की आवक काफी कम हो रही है, इसलिए इसके भाव में ज्यादा मंदे के आसार नहीं हैं। पंजाब पहुंच पोल्ट्री फीड बाजरा का व्यापार 2430 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार जौ में माल्ट कंपनियों की मांग अभी बनी रहेगी, जिस कारण इसके भाव में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। जौ का बकाया स्टॉक कम है, जबकि नई फसल की आवक होली के बाद बढ़ेगी।

चीनी के दाम स्थिर बने हुए है। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, खपत का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। वैसे भी चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन कम होने का अनुमान है।

सरसों के भाव में हल्की नरमी आने का अनुमान हैं। व्यापारियों के अनुसार विश्व बाजार में खाद्वय तेलों के दाम सप्ताहांत में कमजोर हुए थे। वैसे भी उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल है, इसलिए नई सरसों की आवक बनी रहेगी। ऐसे में इसकी कीमतों में हल्की गिरावट आने का अनुमान है। सरसों तेल और खल के दाम स्थिर बने रहे।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के दाम आज लगभग स्थिर हो गए। उधर मलेशियाई पाम तेल के दाम सप्ताहांत में नरम हुए थे, हालांकि इसके दाम साप्ताहिक आधार पर तेज हुए थे। विश्व बाजार में खाद्वय तेलों में अभी ज्यादा मंदा नहीं आएगा, इसलिए घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में हल्की नरमी तो आ सकती है, लेकिन बड़ी गिरावट के आसार कम है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में 10 से 20 रुपये तेज हुए हैं। हालांकि व्यापारी घरेलू बाजार में इसके भाव में अभी ज्यादा तेजी के पक्ष में नहीं है। उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें स्थिर हो गई, उधर विदेशी बाजार में शुक्रवार को इसके दाम सुधरकर बंद हुए थे, इसलिए घरेलू बाजार में इसके भाव में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। जिनर्स दाम घटाकर बिकवाली नहीं कर रहे हैं। उधर स्पिनिंग मिलों की खरीद बनी रहने की उम्मीद है, इसलिए इसके भाव में आगे फिर सुधार आने का अनुमान है। वैसे भी आगामी दिनों में कॉटन की दैनिक आवकों में कमी आयेगी।

बिनौला और कपास खली के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में अब ज्यादा मंदे की उम्मीद नहीं है।

ग्वार सीड और ग्वार गम के भाव रुक गए हैं। व्यापारियों के अनुसार प्लांटों के पास ग्वार सीड का बकाया स्टॉक ज्यादा है। जबकि ग्वार गम उत्पादों का निर्यात चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी के दौरान घटकर 3.39 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 3.50 लाख टन का हुआ था। ऐसे में इसकी कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

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