एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 11 मार्च 2024

चना में मिलाजुला रुख, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव तेज, ग्वार गम एवं सीड के दाम बढ़े
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा, जहां राजस्थानी चना के दाम 25 रुपये तेज हुए, वहीं मध्य प्रदेश के चना के दाम 25 रुपये कमजोर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम साफ है इसलिए राजस्थान और मध्य प्रदेश में नई फसल की आवक बढ़ेगी, जिसे देखते हुए मिलर्स जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। इसलिए चना में अब बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है, तथा मंडियों में अच्छी क्वालिटी का पुराना चना कम है। दिल्ली में राजस्थान के चना के भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, जबकि मध्य प्रदेश के चना के दाम कमजोर होकर 5,925 से 5,950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। चना की दैनिक आवक 7 से 8 मोटरों की हुई। राजस्थान के नए चना के दाम 5,925 से 5,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, इस दौरान मध्य प्रदेश के नए चना के दाम 5,850 से 5,875 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

राजस्थान लाइन की मोठ के दाम दिल्ली में 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें स्थिर हो गई, जबकि चेन्नई में पिछले सप्ताह के अंत में डॉलर में लेमन के दाम कमजोर हुए थे। व्यापारियों के अनुसार हाजिर बाजार में अरहर में ग्राहकी नहीं बढ़ पा रही, जिस कारण स्टॉकिस्टों की सक्रियता से अरहर की कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी बढ़े दाम पर मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी, साथ ही लेमन अरहर के आयात में भी आगामी दिनों में बढ़ोतरी होगी। नई फसल को देखते हुए मिलर्स भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। सोलापुर मंडी में नई देसी अरहर के भाव 9,500 से 10,450 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में स्थिर हो गई, हालांकि शनिवार को इसके दाम कमजोर हुए थे। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में नई फसल की आवक आगामी दिनों में बढ़ेगी। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बढ़ेगी। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में उड़द के कुल उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसकी कीमतों में अब सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,105 डॉलर और एफएक्यू के दाम 1,015 डॉलर प्रति टन बोले गए।

मूंग के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मौसम साफ है इसलिए उत्पादक मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। छिंदवाड़ा में मूंग के भाव 6,800 से 8,050 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम साफ है, इसलिए होली के बाद इन राज्यों की मंडियों में नई मसूर की आवकों में बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। इसलिए इसके भाव में आगे नरमी आने का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,175 स 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के दाम स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि मिलर्स भी दाम घटाकर बिकवाली नहीं कर रहे। इसलिए चावल और धान की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है। पंजाब लाइन से दिल्ली के लिए 1,401 स्टीम चावल का व्यापार 8100 से 8200 रुपये, और राजस्थान लाइन से 8000 से 8100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 115 रुपये तेज होकर भाव 2,725 से 2,750 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों में नया गेहूं आने में अभी समय है। इसलिए इसके भाव तेज हुए हैं, हालांकि बढ़े दाम पर स्टॉक हल्का करना चाहिए।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार पुरानी मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हो गई है, जबकि रबी मक्का की आवक बिहार की मंडियों में चालू सप्ताह भर बाद शुरू हो जायेगी। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। सांगली मंडी में मक्का के भाव 2,375 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

बाजरा की कीमतें कमजोर हुई हैं। हालांकि उत्पादक मंडियों में बाजरे की आवक काफी कम हो रही है, इसलिए इसके भाव में ज्यादा मंदे के आसार नहीं हैं। राजपुरा पहुंच बाजरा का व्यापार 2440 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार जौ में माल्ट कंपनियों की मांग अभी बनी रहेगी, जिस कारण इसके भाव में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। जौ का बकाया स्टॉक कम है, जबकि नई फसल मार्च के अंत और अप्रैल में आयेगी।

चीनी के दाम स्थिर बने हुए है। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, खपत का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। वैसे भी चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन कम होने का अनुमान है।

सरसों के भाव लगभग स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल है, इसलिए नई सरसों की आवक बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में इसकी कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। सरसों तेल के साथ ही खल के दाम स्थिर हो गए।

घरेलू बाजार में पाम और पामोलीन के दाम क्रमश: 3 से 5 रुपये तेज हुए हैं, जबकि अन्य खाद्वय तेलों के दाम स्थिर बने हुए हैं। मलेशियाई पाम तेल के दाम जून महीने के 25 रिगिंट तेज होकर भाव 4,007 रिगिंट प्रति टन हो गए, जबकि शिकागो में भी सोया तेल के दाम तेज हैं। इसलिए घरेलू बाजार में इनकी कीमतों में हल्की तेजी आने के आसार है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। इसलिए व्यापारी घरेलू बाजार में इसके भाव में अभी ज्यादा तेजी में नहीं है। उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन और मील के दाम कमजोर हुए हैं, जबकि सोया तेज की कीमतें तेज खुली हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में सुधार आया है, आज आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतें तेज खुली हैं, इसलिए घरेलू बाजार में भी मिलों की खरीद बढ़ने से भाव में सुधार आया है। घरेलू बाजार में जिनर्स दाम घटाकर बिकवाली कम कर रहे हैं। उधर स्पिनिंग मिलों की खरीद बनी रहने की उम्मीद है, इसलिए इसके भाव में और भी सुधार आने का अनुमान है। वैसे भी आगामी दिनों में कॉटन की दैनिक आवकों में कमी आयेगी।

बिनौला और कपास खली के भाव में सुधार आया हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में अब ज्यादा मंदे की उम्मीद नहीं है।

ग्वार सीड और ग्वार गम के भाव तेज हो गए, हालांकि इसके भाव में अभी बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। व्यापारियों के अनुसार प्लांटों के पास ग्वार सीड का बकाया स्टॉक ज्यादा है। जबकि ग्वार गम उत्पादों का निर्यात चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी के दौरान घटकर 3.39 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 3.50 लाख टन का हुआ था।

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