एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 7 मार्च 2024

मूंग कमजोर, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव स्थिर, ग्वार गम एवं सीड में नरमी
नई दिल्ली। दिल्ली में चना की कीमतों में बुधवार को मंदा आया था, जबकि आज इसके दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम साफ है तथा राजस्थान और मध्य प्रदेश में नई फसल की आवक होली के बाद बढ़ेगी, जिसे देखते हुए मिलर्स जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। इसलिए चना में अब बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है, तथा मंडियों में अच्छी क्वालिटी का पुराना चना कम है। दिल्ली में राजस्थान के चना के भाव 6,125 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, जबकि मध्य प्रदेश के चना के दाम 6,075 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। चना की दैनिक आवक 9 से 10 मोटरों की हुई।

राजस्थान लाइन की मोठ के दाम दिल्ली में 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें स्थिर हो गई, व्यापारियों के अनुसार चेन्नई में डॉलर में इसके दाम लगातार तेज हो रहे हैं, जिस कारण स्टॉकिस्ट घरेलू बाजार में इसकी कीमतें तेज करना चाहते हैं। ऐसे में घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में सुधार बन सकता है। हालांकि बढ़े दाम पर मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। इसलिए अरहर में व्यापारी एकतरफा बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है, क्योंकि बढ़ी हुई कीमतों में दाल मिलों की मांग का समर्थन नहीं मिल पा रहा। वैसे भी केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। जानकारों के अनुसार देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी, साथ ही लेमन अरहर के आयात में भी आगामी दिनों में बढ़ोतरी होगी। नई फसल को देखते हुए मिलर्स भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। सोलापुर मंडी में नई देसी अरहर के भाव 9,500 से 10,550 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतें चेन्नई में डॉलर में स्थिर हो गई, हालांकि पिछले तीन दिनों से इसके दाम लगातार तेज हो रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि कृष्णा जिले में नई उड़द की आवकों में बढ़ोतरी हुई है। उधर उड़ीसा में भी नई उड़द की आवक हो रही है। तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश में नई फसल की आवक अगले सप्ताह से बढ़ने की उम्मीद है। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बढ़ेगी। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में उड़द के कुल उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसकी कीमतों में अब सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,120 डॉलर और एफएक्यू के दाम 1,030 डॉलर प्रति टन बोले गए।

मूंग के भाव दिल्ली में आज भी 50 रुपये कमजोर हुए। व्यापारियों के अनुसार मौसम साफ है इसलिए उत्पादक मंडियों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ने लगी है, साथ ही खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, तथा मूंग का उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। दिल्ली में राजस्थान लाईन की मूंग के भाव 8,850 से 8,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए, हालांकि पिछले दो दिनों से इसके भाव तेज बने हुए थे। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मौसम साफ है, इसलिए होली के बाद इन राज्यों की मंडियों में नई मसूर की आवकों में बढ़ोतरी होगी। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। हालांकि बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। ऐसे में बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के दाम स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल में निर्यातकों की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि मिलर्स भी दाम घटाकर बिकवाली नहीं कर रहे। इसलिए चावल और धान की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है। नरवाना मंडी में डीपी 1,121 किस्म के धान के दाम 4,400 रुपये तथा 1,401 किस्म के कंबाइन धान के भाव 3,925 रुपये तथा 1,718 किस्म के धान के दाम 4,220 रुपये और सिरसा मंडी में 1,401 किस्म के धान के दाम 4,098 रुपये तथा पीबी1 किस्म के 3,691 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2,625 से 2,650 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, तथा बुधवार को इसके दाम कमजोर हुए थे। उत्तर भारत के राज्यों में नई फसल आने में अभी समय है। उधर गुजरात के बाद मध्य प्रदेश एवं राजस्थान की कुछ मंडियों में नये गेहूं की आवक शुरू हो गई है, लेकिन उत्तर भारत के राज्यों में नया गेहूं आने में अभी समय है। इसलिए इसके भाव में हल्का सुधार तो आ सकता है लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

मक्का के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार पुरानी मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हो गई है, जबकि रबी मक्का की आवक बिहार की मंडियों में चालू महीने के मध्य बाद शुरू होगी। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। सांगली मंडी में मक्का के बिल्टी भाव 2,375 से 2,425 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

बाजरा की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। उत्पादक मंडियों में बाजरे की आवक काफी कम हो रही है, इसलिए आगे इसके भाव में सुधार आने का अनुमान है। चरखी दादरी मंडी बाजरा का व्यापार 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार जौ में माल्ट कंपनियों की मांग अभी बनी रहेगी, जिस कारण इसके भाव में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। जौ का बकाया स्टॉक कम है, जबकि नई फसल मार्च के अंत और अप्रैल में आयेगी।

चीनी के दाम स्थिर बने हुए है। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, खपत का सीजन होने के कारण चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन कम होने का अनुमान है।

सरसों के भाव स्थिर हो गए, आयातित खाद्वय तेलों में मिलाजुला रुख है। उत्पादक राज्यों में मौसम साफ है, इसलिए आगामी दिनों में नई सरसों की आवक और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में इसकी  कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। सरसों तेल तथा खल के दाम स्थिर हो गए।

घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों के दाम पांच से दस रुपये तेज हुए हैं। हालांकि मलेशिया में जून महीने के वायदा अनुबंध में पाम तेल की कीमतों में 22 रिगिंट की गिरावट आकर भाव 3,976 रिगिंट प्रति टन रह गए। इसलिए घरेलू बाजार में भी इनकी कीमतों में ज्यादा तेजी के आसार नही है। मलेशिया में पाम तेल के दाम सप्ताहभर में ही 102 रिगिंट प्रति टन तेज हुए हैं।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। इसलिए व्यापारी घरेलू बाजार में इसके भाव में अभी ज्यादा तेजी में नहीं है। उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। शिकागो में सोयाबीन, सोया तेल और मील के भाव तेज खुले हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें दूसरे दिन तेज हुई हैं। विदेशी बाजार में कॉटन की कीमतें लगातार तेज हो रही है, जिस कारण घरेलू बाजार में जिनर्स दाम घटाकर बिकवाली नहीं कर रहे। उधर स्पिनिंग मिलों की खरीद भी बढ़ी है, इसलिए इसके भाव में और भी सुधार आने का अनुमान है। वैसे भी आगामी दिनों में कॉटन की दैनिक आवकों में कमी आयेगी।

बिनौला और कपास खली के भाव में सुधार आया हैं। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी, इसलिए इनकी कीमतों में अब ज्यादा मंदे की उम्मीद नहीं है।

ग्वार सीड और ग्वार गम के भाव में नरमी आई है, व्यापारी इसके भाव में बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। व्यापारियों के अनुसार प्लांटों के पास ग्वार सीड का बकाया स्टॉक ज्यादा है। जबकि ग्वार गम उत्पादों का निर्यात अप्रैल से दिसंबर के दौरान पिछले साल की तुलना में कम हुआ है। 

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