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प्रतिकूल मौसम एवं तेल मिलों की खरीद बनी रहने से दूसरे दिन सरसों की कीमतें बढ़ी

नई दिल्ली। उत्पादक राज्यों में प्रतिकूल मौसम एवं तेल मिलों की खरीद बनी रहने से घरेलू बाजार में शनिवार को लगातार दूसरे दिन सरसों की कीमतों में सुधार आया। जयपुर में कंडीशन की सरसों के भाव 25 रुपये तेज होकर दाम 5,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान सरसों की दैनिक आवक घटकर 7.25 लाख बोरियों की रह गई।

विश्व बाजार में सप्ताहांत में खाद्वय तेलों की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा था। जानकारों के अनुसार मलेशिया से पाम तेल उत्पादों के निर्यात में फरवरी में कमी आई है, जिस कारण बकाया स्टॉक बढ़ रहा है। ऐसे में विदेशी बाजार में खाद्य तेलों की मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। घरेलू बाजार में सरसों तेल की कीमतों में दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान सरसों खल के भाव स्थिर बने रहे।

उत्पादक मंडियों में शनिवार को भी सरसों की दैनिक आवक में कमी दर्ज की गई। उत्पादक राज्यों में मौसम खराब है, तथा कई क्षेत्रों में बारिश एवं ओलावृष्टि से नई फसल की कटाई एवं आवक प्रभावित हुई है। हालांकि उत्पादक राज्यों में मौसम साफ होने के बाद नई सरसों की आवकों में बढ़ोतरी होगी। चालू सीजन में सरसों का उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए तेल मिलें भी केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। खपत का सीजन होने के कारण सरसों तेल में मांग अभी बनी रहेगी, लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक आयातित खाद्य तेलों के दाम पर ही निर्भर करेगी।

सरसों तेल में तेजी

जयपुर में सरसों तेल कच्ची घानी और एक्सपेलर की कीमतों में दूसरे दिन भी तेजी दर्ज की गई। कच्ची घानी सरसों तेल के भाव 10 रुपये तेज होकर दाम 1,025 रुपये प्रति 10 किलो हो गए, जबकि सरसों एक्सपेलर तेल के दाम भी 10 बढ़कर भाव 1,015 रुपये प्रति 10 किलो हो गए। इस दौरान गंगापुर में सरसों तेल कच्ची घानी के दाम तेज होकर 1,005 से 1,007 रुपये प्रति 10 किलो हो गए। भरतपुर में सरसों तेल कच्ची घानी के दाम बढ़कर 1,015 से 1,025 रुपये प्रति 10 किलो हो गए।

विश्व बाजार में सप्ताहांत में खाद्वय तेलों की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा था। जानकारों के अनुसार मलेशिया से पाम तेल उत्पादों के निर्यात में फरवरी में कमी आई है, जिस कारण बकाया स्टॉक बढ़ रहा है। ऐसे में विदेशी बाजार में खाद्य तेलों की मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। घरेलू बाजार में सरसों तेल की कीमतों में दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई।

सरसों खल स्थिर, डीओसी में सुधार

जयपुर में शनिवार को सरसों खल की कीमतें 2,525 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर बनी रही। इस दौरान गंगापुर में सरसों खल के भाव 2,530 से 2,550 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। नीमच मंडी में सरसों खल की कीमतें 2,525 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गई।

घटे दाम पर निर्यातकों के साथ ही स्थानीय मांग बढ़ने से डीओसी की कीमतें तेज हो गई। कोटा में सरसों डीओसी के बिल्टी भाव 300 रुपये तेज होकर दाम 21,800 रुपये प्रति टन हो गए। इस दौरान मुरैना में सरसों डीओसी के बिल्टी दाम 200 रुपये तेज होकर 21,500 रुपये प्रति टन बोले गए। कानपुर में सरसों डीओसी के बिल्टी भाव 300 रुपये बढ़कर 21,800 रुपये प्रति टन हो गए।

नीचे दाम पर तेल मिलों की बिक्री कमजोर होने से सरसों खल की कीमतें स्थिर हुई। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में पिछले 24 घंटों के दौरान बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से फसल को नुकसान हुआ है। इससे जहां मंडियों में नई सरसों की आवक प्रभावित होगी, वहीं प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आशंका है। इसलिए सरसों खल की कीमतों में हल्का सुधार बन सकता है।

घटे दाम पर निर्यातकों के साथ ही स्थानीय मांग से डीओसी की कीमतें तेज हुई। व्यापारियों के अनुसार सरसों के उत्पादक राज्यों राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा पंजाब के कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से नई फसल की आवक प्रभावित होगी। इसके भाव में हल्का सुधार और भी आ सकता है, लेकिन बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।

सरसों की दैनिक आवक कम

देशभर की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक घटकर 7.25 लाख बोरियों की हुई, जबकि पिछले कारोबारी दिवस में भी आवक 8 लाख बोरियों की हुई थी। कुल आवकों में से प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान की मंडियों में नई सरसों की 3.25 लाख बोरी, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में एक लाख बोरी, उत्तर प्रदेश की मंडियों में एक लाख बोरी, पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में 15 हजार बोरी तथा गुजरात में 55 हजार बोरी, एवं अन्य राज्यों की मंडियों में 1.30 लाख बोरियों की आवक हुई।

कॉटन वॉश की कीमतें स्थिर

विश्व बाजार में सप्ताहांत में खाद्वय तेलों की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा था, जबकि घरेलू बाजार में कॉटन वॉश की कीमतें स्थिर हो गई। धुले में कॉटन वॉश के दाम 875 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए। इस दौरान अकोला में कॉटन वॉश के भाव 875 रुपये प्रति 10 किलो बोले गए। अमरावती में कॉटन वॉश की कीमतें 875 रुपये प्रति दस किलो के स्तर पर स्थिर हो गई।

विश्व बाजार में सप्ताहांत में खाद्वय तेलों की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा था। जानकारों के अनुसार मलेशिया से पाम तेल उत्पादों के निर्यात में फरवरी में कमी आई है, जिस कारण बकाया स्टॉक बढ़ रहा है। ऐसे में विदेशी बाजार में खाद्य तेलों की मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। घरेलू बाजार में कॉटन वॉश की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

बिनौला के दाम स्थिर, कपास खली स्थिर से नरम

तेल मिलों की मांग सीमित बनी रहने से बिनौले के भाव उत्तर भारत के राज्यों में स्थिर हो गए। हरियाणा में बिनौले के भाव 2250 से 2550 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान श्रीगंगानगर लाइन में बिनौला के भाव 2300 से 2650 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। बिनौला के दाम पंजाब में 2250 से 2550 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

खपत राज्यों की सीमित मांग के कारण कपास खली की कीमतें स्थिर से नरम हुई। सेलु में कपास खली की कीमतें कमजोर होकर 2,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। इस दौरान शाहपुर में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली के दाम 20 रुपये कमजोर होकर 2,880 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। भोकर में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली के दाम 2,850 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गए।

तेल मिलों की सीमित मांग बिनौला के भाव में उत्तर भारत के राज्यों में स्थिर हो गए। विश्व बाजार में सप्ताहांत में खाद्वय तेलों के भाव में मिलाजुला रुख रहा था। हालांकि मलेशिया से पाम तेल का बकाया स्टॉक ज्यादा है, अत: विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में अभी बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। घरेलू मंडियों में कपास की दैनिक आवक आगामी दिनों में घटेगी, लेकिन विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कमजोर मांग को देखते हुए तेल मिलें जरुरत के हिसाब से ही बिनौला की खरीद कर रही हैं। अत: इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

ग्राहकी सीमित बनी रहने के कारण कपास खली की कीमतें दूसरे दिन स्थिर से नरम हो गई। व्यापारियों के अनुसार तेल मिलों को नीचे दाम पर पड़ते नहीं लग रहे, इसलिए बिकवाली कम आ रही है। हालांकि कपास खली में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है। इसलिए इसकी कीमतों में हल्का सुधार तो आ सकता है, लेकिन अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। हालांकि उत्पादक राज्यों में कपास की दैनिक आवक पहले की तुलना में हुई है, इसलिए मिलें दाम घटाकर बिकवाली नहीं करना चाहती।

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