एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 24 फरवरी 2024

एग्री जिंसों की दैनिक रिपोर्ट 24 फरवरी 2024
चना एवं अरहर मंदी, अन्य दालों के भाव स्थिर
गेहूं के भाव स्थिर, ग्वार गम एवं सीड में नरमी
नई दिल्ली। दिल्ली में चना के दाम लगातार दूसरे दिन 40 से 50 रुपये कमजोर हुए है। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक राज्यों में मौसम साफ है इसलिए आगामी दिनों में नई फसल की आवक बढ़ेगी। राजस्थान और मध्य प्रदेश में होली के बाद नई फसल की आवक का दबाव बनेगा। इसलिए मिलें इस समय जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। अत: बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है, तथा मंडियों में अच्छी क्वालिटी का पुराना चना कम है। इसलिए अभी एकतरफा बड़ी गिरावट के आसार भी अभी कम है। दिल्ली में राजस्थान के चना के भाव 40 रुपये घटकर 6,225 से 6,235 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, जबकि मध्य प्रदेश के चना के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 6,175 से 6,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। चना की दैनिक आवक 13 से 14 मोटरों की हुई।

राजस्थान लाइन की मोठ के दाम दिल्ली में 6,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

सोलापुर में अरहर की कीमतें 175 रुपये कमजोर हो गई। व्यापारियों के अनुसार चेन्नई में लेमन अरहर के दाम डॉलर में पिछले दो दिनों में कमजोर हुए हैं, जिस कारण घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों पर दबाव है। उधर केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है, इसलिए बढ़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। वैसे भी अरहर में बढ़े दाम पर मिलों की मांग का समर्थन नहीं मिल पा रहा है। जानकारों के अनुसार बढ़े दाम पर दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही अरहर की खरीद कर रही है। देसी अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहेगी, साथ ही लेमन अरहर के आयात में भी आगामी दिनों में बढ़ोतरी होगी। नई फसल को देखते हुए मिलर्स भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। सोलापुर मंडी में नई देसी अरहर के भाव 9,500 से 10,400 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

आयातित उड़द की कीमतों में चेन्नई में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन नरमी आई थी, हालांकि घरेलू बाजार देसी के दाम लगभग बने रहे। जानकारों के अनुसार हाजिर बाजार में उड़द दाल में थोक एवं खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, साथ ही कृष्णा जिले में नई उड़द की आवकों में बढ़ोतरी हुई है। आगामी दिनों में नई फसल की आवक और बढ़ेगी। उधर उड़ीसा में भी नई उड़द की आवक हो रही है। केंद्र सरकार की सख्ती से उड़द की खरीद दाम मिलें केवल जरुरत के हिसाब से कर रही रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बढ़ेगी। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में उड़द के कुल उत्पादन अनुमान कम होने की आशंका है। इसलिए इसकी कीमतों में तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम 1,110 डॉलर और एफएक्यू के दाम 1,020 डॉलर प्रति टन बोले गए।

उत्पादक मंडियों में मूंग के भाव आज भी स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार मूंग की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी हुई है। खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में खपत राज्यों की मांग अभी बनी रहेगी, तथा खरीफ में मूंग का उत्पादन अनुमान कम हुआ। चालू रबी में बुआई में कमी हुई। वैसे भी उत्पादक राज्यों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में कमी हुई है। हालांकि नेफेड लगातार मूंग बेच रही है। इसलिए मूंग की कीमतों में एकतरफा बढ़ी तेजी, मंदी के आसार नहीं हैं। दिल्ली में राजस्थान लाईन की मूंग के भाव 8,900 से 9,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

देसी मसूर के दाम स्थिर हो गए, हालांकि गुरुवार पिछले दो दिनों से लगातार मंदा आया है। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश की मंडियों में नई मसूर की आवक शुरू हो गई है, तथा मौसम साफ रहा तो होली के बाद मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में नई मसूर की आवकों में बढ़ोतरी होगी। व्यापारियों के अनुसार बकाया स्टॉक कम होने के कारण पुरानी देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हो रही है, जबकि मसूर दाल में खपत राज्यों बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। आयातक भी दाम घटाना नहीं चाहते, इसलिए मौजूदा कीमतों में हल्की नरमी और आ सकती है लेकिन अभी बड़ी गिरावट के आसार कम है। चालू रबी में मसूर के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है। दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,100 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

धान के साथ ही बासमती चावल के दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों की नजर दुबई में गल्फ फूड पर टिकी हुई है, इसमें निर्यात सौदे अच्छे हुए तो बासमती चावल की कीमतों में एक बार फिर सुधार बन सकता है। सिरसा मंडी में डीपी 1,401 किस्म के धान के दाम 4,000 से 4,346 रुपये तथा रतिया मंडी में 1,401 किस्म के धान के दाम 4,245 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

गेहूं के दाम लारेंस रोड पर 2,425 से 2,450 रुपये प्रति क्विंटल पर तीसरे दिन भी स्थिर बने रहे। गुजरात के बाद मध्य प्रदेश की कुछ मंडियों में नये गेहूं की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम साफ रहा तो आगामी दिनों में इसकी दैनिक आवक बढ़ेगी। सरकार ओएमएसएस के साथ गेहूं की बिक्री उत्तर भारत के राज्यों में पहली मार्च से बंद करेगी।

मक्का के भाव स्थिर ही बने हुए है। व्यापारियों के अनुसार पुरानी मक्का की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम हो गई है, जबकि रबी मक्का की आवक चालू महीने के अंत तक बिहार में शुरू हो जायेगी। इसलिए इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। सांगली मंडी में मक्का के भाव बिल्टी भाव 2375 से 2,425 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बाजरा की कीमतें स्थिर हो गई। उत्पादक मंडियों में बाजरे की आवक काफी कम हो रही है, इसलिए आगे इसके भाव में सुधार आने का अनुमान है। पंजाब में बाजरा का व्यापार 2440 से 2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

जौ के भाव उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार जौ में माल्ट कंपनियों की मांग अभी बनी रहेगी, जिस कारण इसके भाव में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। जौ का बकाया स्टॉक कम है, जबकि नई फसल मार्च, अप्रैल में आयेगी।

चीनी के दाम स्थिर बने हुए है। व्यापारी अभी चीनी में ज्यादा मंदे में नहीं है, वैसे भी आगे खपत का सीजन शुरू होगा, इसलिए चीनी में मांग बनी रहने की उम्मीद है। चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन अनुमान 333.5 लाख टन होने का अनुमान है।

सरसों के भाव स्थिर ही बने हुए हैं। हालांकि विदेशी बाजार में आज खाद्वय तेलों के दाम तेज खुले हैं, लेकिन घरेलू मंडियों में नई सरसों की आवक लगातार बढ़ रही है, तथा मौसम अनुकूल है। इसलिए आगामी दिनों में आवकों का दबाव बनेगा, वैसे भी चालू सीजन में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। ऐसे में कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। सरसों तेल के दाम स्थिर हो गए, जबकि खल की कीमतें भी रुक गई।

घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतें लगभग स्थिर हो गई। चालू सप्ताह में मलेशिया में पाम तेल की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रही। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में अभी खाद्वय तेलों की कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है, इसलिए घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है।

सोयाबीन के दाम उत्पादक मंडियों में स्थिर बने हुए हैं। विदेश में इसके भाव में चालू सप्ताह के अंत में मिलाजुला रुख रहा था। इसलिए व्यापारी घरेलू बाजार में इसके भाव में अभी ज्यादा तेजी में नहीं है। उत्पादक मंडियों में अभी दैनिक आवक बराबर बनी रहेगी है, जबकि प्लांट जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं।

घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें स्थिर हो गई। हालांकि चालू सप्ताह में विदेशी बाजार में कॉटन की कीमतें तेज हुई। जानकारों के अनुसार विश्व बाजार में कॉटन के दाम तेज होने से इसके निर्यात में पड़ते लग रहे, इसलिए स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने से घरेलू बाजार में इसके भाव में ज्यादा मंदा नहीं आयेगा। वैसे भी आगामी दिनों में कॉटन की दैनिक आवकों में कमी आयेगी।

बिनौला और कपास खली के भाव में गिरावट आई है। व्यापारी बिनौला एवं कपास खली में अभी बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है। उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में जरुर पहले की तुलना में कमी आने लगी है, तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी लेकिन ग्राहकी भी सामान्य की तुलना में कमजोर है।

ग्वार सीड और ग्वार गम के भाव नरम हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार ग्वार सीड में प्लांटों की मांग सीमित बनी हुई है, क्योंकि प्लांटों के पास ग्वार सीड का बकाया स्टॉक ज्यादा है। ग्वार गम उत्पादों की निर्यात अप्रैल से दिसंबर के दौरान पिछले साल की तुलना में कम हुआ है। उधर उत्पादक मंडियों में इसकी दैनिक आवक पहले की तुलना में कम हुई है। इसलिए हल्की तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

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